
यूनियन का आरोप, पुरानी कंपनी ने नहीं दिया पैसा, नई भी कर रही शोषण, डीसी को सौंपा ज्ञापन
शिमला – जसपाल ठाकुर
हिमाचल प्रदेश में बुधवार से 108 एंबुलेंस की पहिए थम जाएंगे। 108 कर्मचारियों ने सरकार को अल्टीमेटम दिया है कि अगर सरकार उनकी मांगों को 25 मई शाम आठ बजे तक पूरा नहीं करती है, तो सभी कर्मचारी अपनी-अपनी गाडिय़ां छोड़ देंगे। प्रदेश के सभी जिलों से फिर एंबुलेंस कर्मचारी शिमला की ओर कूच करेंगे।
एंबुलेंस कर्मचारी यूनियन ने इस मसले पर सोमवार को जिला उपायुक्त शिमला को ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन के माध्यम उन्होंने साफ किया है कि अगर सरकार उनकी मांगों को गंभीर नहीं होती है, तो इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।
एबंलेंस कर्मचारी यूनियन के अध्यक्ष पूर्ण चंद ने बताया कि प्रदेश में एंबुलेंस सेवा प्रदान कर रही पुरानी कंपनी जीवीके ने कर्मचारियों को एक महीने का वेतन नहीं दिया है। साथ ही 2015 से कर्मचारियों को मिलने वाले एरियर की अदायगी भी नहीं की गई है। कर्मचारियों को गेच्यटी व अन्य वित्तीय भत्ते भी प्रदान नहीं किए गए हैं।
जीवीके कंपनी का करार समाप्त होने के बाद कंपनी चली गई है, लेकिन कर्मचारियों के पैसे की अदायगी नहीं हुई है। ऐसे में अब कर्मचारी जाएं, तो कहां। स्वास्थ्य विभाग व प्रदेश सरकार द्वारा इस ओर से भी इस मामले में हस्तक्षेप नहीं किया जा रहा है।
वहीं नई कंपनी मेडसवान फाउंडेशन एंबुलेंस सेवा का काम संभाला है। नई कंपनी भी कर्मचारियों का शोषण कर रही है। पुरानी कंपनी के अधिकारियों को नौकरी पर रखा है। ये कर्मचारियों का शोषण कर हैं।
पुरानी कंपनी में सेवाएं दे रहे करीब 150 लोगों को अभी तक नौकरी पर नहीं रखा गया है, और नए कर्मचारियों को नियुक्ति दी गई है। कर्मचारियों को अभी तक ज्वाइनिंग लैटर भी प्रदान नहीं किए गए हैं, सिर्फ ऑफर लेटर के सहारे काम चलाया जा रहा है।
कोर्ट के आदेश भी नहीं हुए लागू
एंबुलेंस कर्मचारी यूनियन के अध्यक्ष पूर्णचंद का कहना है कि कोर्ट की ओर से आदेश जारी किए गए थे कि कर्मचारियों को कम से कम 18 हजार रुपए का वेतन दिया जाए। इसमें से 15 हजार का वेतन कर्मचारियों को इनहैंड मिलना चाहिए। लेकिन दो साल का समय बीत जाने के बाद अभी तक कोर्ट के आदेशों को लागू नहीं किया गया है। ऐसे में कर्मचारियों को शोषित होना पड़ रहा है।
