
व्यूरो रिपोर्ट
करुणामूलक संघ लगभग 173 दिन से शिमला काली बाड़ी के पास बर्षाशालिका में भूख हड़ताल पर बैठा है | लेकिन गूंगी बहरी सरकार के द्वारा अभी तक सुधबुध तक नही ली गयी है जबकि प्रदेश भर के करुणामूलक परिवार इस आंदोलन में भाग ले रहे है व कंधे से कंधा मिलाकर एक दूसरे के साथ चले है|
प्रदेशाध्यक्ष अजय कुमार का कहना है कि 173 दिनों के इस संघर्ष में सरकार कभी भी करुणामूलक आश्रितों का हाल जानने बर्षाशालिका में पहुंची तक नही है जबकि 2017 में करुणामूलक परिवारों का सरकार बनाने में बहुत बड़ा योगदान रहा है, लेकिन इस योगदान के बाद सरकार नें सवा चार साल से करुणामूलक परिवारों को दरकिनार ही किया है|
प्रदेशाध्यक्ष अजय कुमार का कहना है कि अब करुणामूलक परिवारों को हल्के में नही लिया जाए | अगर सरकार को विधान सभा में करुणामूलक परिवारों के वोट चाहिए तो आगामी कैबिनेट में करुणामूलक नोकरियाँ बहाल कर दे, वरना अब की बार जमानत भी जबत हो जायेगी | अगर सरकार जल्द करुणामूलक आश्रितों को एक साथ नियुक्तियाँ नही देती है तो जल्द करुणामूलक संघ “मिशन जमानत जबत” पर काम करना शुरू कर देगा |
मुख्य मांगे:-
1) समस्त विभागों, बोर्डों, निगमों में लंबित पड़े करुणामूलक आधार पर दी जाने वाली नोकरियों में Class-C के केसों को आगामी कैबिनेट में लाया जाए व उनको छठे वेतन आयोग से पहले One Time Settlement के तेहत सभी को एक साथ नियुक्तियाँ दी जाएं |
2) क्लास-C में जितने भी मामले आ रहे है उन्हे योग्यता के आधार पर विभिन्न श्रेणियों में नियुक्तियाँ दी जाए ताकि कलर्क के पद पर ज्यादा बोझ न पड़े और जिन करुणामूलक आश्रितों की योग्यता Technical Education में है उनको उसी श्रेणी में नौकरी दी जाए |
3) पॉलिसी में संशोधन किया जाए जिसमें 62500 एक सदस्य सालाना आय शर्त व 5% कोटा शर्त को हटाया जाये |
