आठ साल बाद ISRO का मंगलयान हुआ खामोश, ईधन और बैटरी खत्म होने से टूटा संपर्क

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व्यूरो – रिपोर्ट

उम्मीद से कई गुना ज्यादा समय तक देश को मंगल ग्रह के बारे में जरूरी सूचनाएं प्रदान करने के बाद भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) का मंगलयान ईधन और बैटरी खत्म होने के कारण आठ साल बाद खामोश होकर अंतरिक्ष में गुम हो गया है।

मंगलयान छोड़े जाने के आठ साल पूरा होने के मौके पर इसरो द्वारा आयोजित राष्ट्रीय बैठक में कहा गया कि वर्ष 2013 में मंगलयान को छह महीने के लिए प्रक्षेपित किया गया था मगर यान ने करीब आठ सालों तक मंगल ग्रह और सौर कोरोना की टोह लेते हुए कई महत्वपूर्ण जानकारियां भेजी।

पिछली अप्रैल से यान से संपर्क नहीं साधा जा सका। इससे यह मान लिया गया कि यान में जरूरी ईधन और बैट्री पूरी तरह समाप्त हो चुकी है और यान अंतरिक्ष की गहराइयों में गुम हो चुका है। इसरो ने मंगलवार को आधिकारिक बयान जारी कर कहा “ यह घोषणा की जाती है कि अंतरिक्ष यान लापता हो चुका है और यह मान लिया गया है कि उसका जीवन पूरा हो चुका है।

मंगल मिशन को हमेशा एक उल्लेखनीय तकनीकी सफलता के तौर पर जाना जायेगा। ग्रहों की खोज के इतिहास में यह वैज्ञानिक उपलब्धि बेहतरीन रही है।

” बैठक में इसरो के वैज्ञानिक सचिव शांतनु भाटवाडेकर ने कहा कि मंगलयान को पांच नवम्बर 2013 को लांच किया गया था। लगभग 300 दिन की यात्रा कर यान 14 सितम्बर 2014 को मंगल की कक्षा में स्थापित किया गया था। पिछले आठ सालों में मंगलयान ने लाल ग्रह को समझने में खासा योगदान दिया है।

इसरो के पूर्व चेयरमैन डा के राधाकृष्णनन ने कहा कि मंगल मिशन से अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में काफी कुछ सीखने को मिला। इसके आकृति विज्ञान, मंगल ग्रह के वातावरण को समझने में भरपूर मदद की। मंगलयान को एक ही प्रयास में स्थापित करने वाला भारत दुनिया का इकलौता देश है।

इसरो के एक और पूर्व अध्यक्ष ए एस किरन कुमार ने कहा, “मार्स आर्बिटर यान को छह महीने की क्षमता के अनुरूप बनाया गया था मगर इसने आठ सालों तक अपना काम बखूबी से किया है। यह बेमिसाल उपलब्धि है। ”

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