आंखों पर पट्टी बांधकर भी सब कुछ पढ़ लेते हैं नगरोटा बगवां के ये 3 भाई-बहन

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नगरोटा बगवां – राजीव जस्वाल

आंखों पर पट्टी और हाथ में किताब। जो भी पन्ना खोलिए दृष्ट्री ऐसे पढ़ती है जैसे खुली आंखों से देख रही हो। बात सिर्फ मोबाइल तक नहीं है, वह मोबाइल पर मैसेज भी बंद आंखों से पढ़ लेती है। यहां तक कि किसी चीज का रंग महसूस करके भी बता सकती है।

नगरोटा बगवां में 1995 से रह रहे बिहार के विपन कुमार और उनकी पत्नी इंदू देवी खुद 8वीं और 10वीं पास हैं लेकिन उन्होंने तीनों बच्चों को मैथ माइंड जापान की खोज विद्या को सीखा दिया है।

उनकी बड़ी बेटी 11 साल की दृष्ट्री पिछले 3 साल से सीख रही है जबकि उससे छोटे वाली श्रेया और भाई अभिनंदन भी इस कला में माहिर बन रहे हैं।

दुकानदार पिता का मानना है कि दृष्ट्री आंखों में पट्टी बांधकर 300 मीटर दूर जा रही कार में कितने लोग बैठे हैं, रंग कैसा है, बता सकती है। अखबार पढ़ सकती है, रंग या कलाकृति को छू कर बता सकती है।

दूर रखी किसी चीज को बंद आंखों से महसूस करके बता सकती है। तीनों बच्चे नगरोटा बगवां के एक निजी स्कूल में पढ़ रहे हैं। दृष्ट्री का कहना है कि वह बड़ी होकर डॉक्टर बनना चाहती है

5 साल पहले देखी थी वीडियो, वहीं से आया आईडिया

बच्चों के पिता विपन कुमार ने बताया कि 5 साल पहले मैंने सोशल मीडिया पर वीडियो देखी थी। फिर उसके बारे में पूरी जानकारी हासिल की। जयपुर और दिल्ली से इसके उपकरण खरीदे। खुद कर नहीं सकता था तो बच्चों पर ट्राई किया।

मेरा मामना है कि आमतौर पर हमारा एक ब्रेन काम करता है लेकिन इनके दोनों काम कर रहे हैं। इससे बच्चे की लर्निंग कैपेसिटी और याद रखने की क्षमता बढ़ती है। मैं बच्चों के साथ आज भी वर्कशॉप, मीटिंग जो भी एजुकेशन के संबंधी सैमीनार हो उन्हें अटैंड करता हूं। आज के समय में पढ़ाई से ज्यादा प्रैक्टिकल होना जरूरी है।

कैसे संभव है यह

जानकारी के अनुसार यह जापानी विद्या है जो 5 से 15 साल के बच्चों को संगीत के जरिए आसानी से सिखाई जा सकती है। माना जाता है कि 5 से 15 साल का बच्चा जो भी पढ़ता है वो दिमाग के बाएं भाग में आता है।

उसे ध्यान के माध्यम से इमेज बनाकर दाएं भाग में ट्रांसफर कर देता है। जो अमिट होता है और सामने ही उसको सचित्र चित्रण कर देता है। माइंड एक्साइज ब्रेनजिम विद्या के जरिए यह विद्या सिखाई जाती है। इसके लिए संगीत का सहारा लिया जाता है।

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