अब महिलाएं संभालेंगी बदहाल सड़कें संवारने का काम

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हिमाचल में भी उत्तराखंड की तर्ज पर होगा काम, डलहौजी में सफल रहा मॉडल अब पूरे प्रदेश में होगा लागू

शिमला- जसपाल ठाकुर

हिमाचल प्रदेश में बदहाल सड़कों को संवारने की कमान अब महिलाएं संभालेंगी। सड़कों की देखभाल लोक निर्माण विभाग की लेबर नहीं, बल्कि महिला मंडल की सदस्य करती नजर आएंगी। केंद्र सरकार के आदेश और विश्व बैंक के लगातार बढ़ते दबाव के बाद लोक निर्माण विभाग ने सड़कों का रखरखाव कम्युनिटी कांट्रेक्ट में करवाने की ओर कदम बढ़ाए हैं।

लोक निर्माण विभाग ने ट्रायल के आधार पर डलहौजी मंडल की एक सड़क कम्युनिटी कांट्रेक्ट में रखरखाव के लिए दी है और अब इसके परिणाम बेहतर आने के बाद पूरे मॉडल को प्रदेश में लागू किया जा रहा है। गौरतलब है कि लोक निर्माण विभाग प्रदेश भर में सड़कों के गड्ढे नहीं भर पा रहा है।

22 हजार किलोमीटर सड़कों में से करीब साढ़े चार हजार किलोमीटर सड़कों के लिए हर साल रिपेयर की जरूरत पड़ती है। विभाग के पास लेबर की कमी चल रही है और निजी ठेकेदारों से काम करवाने के लिए धन का अभाव इस काम में रोड़ बन रहा है।

अब समाधान के तौर पर विभाग ने महिलाओं और ग्रामीणों को सड़कों के रखरखाव से जोड़ने की तैयारी में है। दरअसल, यह मॉडल उत्तराखंड से निकल कर सामने आया है। उत्तराखंड में महिला मंगल के नाम से गठित महिला समूह सड़कों की देखभाल कर रही हैं। थोड़े-थोड़े किलोमीटर की जिम्मेदारी कई महिला समूहों के पास है।

यह महिलाएं इन सड़कों की देखभाल पूरा दिन नहीं, बल्कि घंटे के हिसाब से कर रही हैं और इससे सड़कों की हालत में सुधार के साथ ही इन्हें रोजगार भी मिला है। अब हिमाचल में भी लोक निर्माण विभाग खराब सड़कों में सुधार के लिए इसी प्रारूप को अपनाने का प्रयास कर रहा है।

मुख्य अभियंता लोक निर्माण विभाग प्रोजेक्ट अजय गुप्ता ने बताया कि विभाग सड़कों में सुधार के प्रयास कर रहा है। इसके लिए महिला मंडल समूहों को जोड़ा जा सकता है। उन्होंने कहा कि डलहौजी में इस योजना पर काम चल रहा है। उन्होंने कहा कि सड़कों को गड्ढों से बचाने में इस तरह के प्रयास कारगर साबित हो सकते हैं। इससे सड़कें लंबे समय के लिए टिकाऊ बनी रहेंगी। (एचडीएम)

विश्व बैंक भी महिलाओं की भागीदारी का पक्षधर

केंद्र सरकार ने ग्रामीणों को रोजगार देने के उद्देश्य से इस योजना को लागू करने के आदेश जारी किए हैं, जबकि हिमाचल में विश्व बैंक भी सड़कों के मामले में महिलाओं की भागीदारी के पक्ष में है। इसके साथ इस योजना को लागू करने का दबाव उत्तराखंड से भी आ रहा है।

महिला मंडल के लिए टुकड़ों में बांटी जाएंगी सड़कें

विभाग कई किलोमीटर के दायरे में फैली 22 हजार किलोमीटर लंबी सड़कों को महिला मंडल के आधार पर विभाजित करेगा। एक महिला मंडल के पास तीन से चार किलोमीटर का दायरा होगा और इस दायरे को पांच साल तक साफ-सुथरा और गुणवत्तापूर्ण बनाए रखना महिला मंडल की जिम्मेदारी होगी। इस आधार पर ही विभाग की ओर से महिलाओं को तय भुगतान किया जाएगा।

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