KBC के मंच पर गूंजा सिरमौर का ‘सिंहटू नृत्य’, जनिए…पारंपरिक नृत्य का महत्व एवं इतिहास

--Advertisement--

हिमखबर डेस्क

हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले की समृद्ध लोक संस्कृति एक बार फिर राष्ट्रीय मंच पर छा गई, जब लोकप्रिय टीवी शो कौन बनेगा करोड़पति में ‘सिंहटू नृत्य’ से जुड़ा सवाल पूछा गया। इस मंच पर इस पारंपरिक नृत्य का जिक्र होना न केवल सिरमौर बल्कि पूरे हिमाचल के लिए गर्व का क्षण बन गया। इससे पहले दिल्ली में 2026 की गणतंत्र दिवस की परेड़ में भी इस नृत्य को प्रस्तुत किया गया।

शो के दौरान महानायक अमिताभ बच्चन ने एक कंटेस्टेंट से सवाल किया कि ‘सिंहटू नृत्य’ देश के किस राज्य का लोकप्रिय नृत्य है?  हालांकि कंटेस्टेंट इस सवाल का सही जवाब नहीं दे पाया, लेकिन इसके बाद जैसे ही सही उत्तर बताया गया, यह नृत्य फिर से चर्चा में आ गया और लोगों की जिज्ञासा का केंद्र बन गया।

इस दौरान अमिताभ बच्चन ने न केवल सही जवाब साझा किया, बल्कि सिरमौर के प्रसिद्ध हाटी समुदाय का भी उल्लेख किया, जिससे इस नृत्य की सांस्कृतिक गहराई और महत्व को और भी पहचान मिली। यह पल दर्शकों के लिए जानकारीपूर्ण होने के साथ-साथ हिमाचल की लोक विरासत को राष्ट्रीय पहचान दिलाने वाला साबित हुआ।

क्यों किया जाता है सिंहटू नृत्य, क्या है इतिहास

हिमाचल प्रदेश की समृद्ध लोक संस्कृति में अनेक रंग-बिरंगे नृत्य शामिल हैं, जो न केवल मनोरंजन का माध्यम हैं, बल्कि समाज की परंपराओं, आस्था और इतिहास को भी जीवंत रखते हैं। इन्हीं में से एक है सिरमौर जिले का प्रसिद्ध सिंहटू नृत्य, जिसने अपनी अनूठी शैली और गहरी सांस्कृतिक जड़ों के कारण स्थानीय से लेकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहचान बनाई है।

सिंहटू नृत्य सिर्फ एक कला नहीं, बल्कि आस्था और परंपरा का प्रतीक है। सिरमौरी बोली में “सिंहटू” का अर्थ शेर का बच्चा होता है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार शेर मां दुर्गा का वाहन माना जाता है, इसलिए इस नृत्य का धार्मिक महत्व भी अत्यंत गहरा है। आदिकाल से यह नृत्य देव स्थलों पर विशेष अवसरों पर प्रस्तुत किया जाता रहा है।

यह नृत्य वर्ष में केवल दो बार, दीपावली और एकादशी के पावन अवसर पर ही किया जाता है। इस दौरान मंदिरों और देव स्थलों से विशेष मुखौटे बाहर निकाले जाते हैं, जिन्हें बेहद श्रद्धा और परंपरा के साथ संभालकर रखा जाता है। नृत्य के दौरान कलाकार सिंह, रीछ, राल और बणमानुष जैसे विभिन्न रूपों के मुखौटे पहनकर प्रस्तुति देते हैं, जो इसे और भी आकर्षक और रहस्यमयी बनाते हैं।

वर्तमान समय में यह नृत्य सिरमौर जिले के मटलोडी कुफ्फर, लेऊ नाना जैसे गांवों में प्रमुख रूप से किया जाता है। हालांकि, इसकी लोकप्रियता अब गांवों तक सीमित नहीं रही। राज्यस्तरीय कार्यक्रमों से लेकर शिमला के रिज मैदान जैसे प्रतिष्ठित मंचों पर भी सिंहटू नृत्य की प्रस्तुति दी जाती है, जहां यह दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देता है। यही नहीं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस नृत्य को पहचान दिलाने में लोक कलाकार जोगिंदर हाबी का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उनके प्रयासों से सिंहटू नृत्य ने विश्व मंच पर अपनी अलग पहचान बनाई है।

सिंहटू नृत्य केवल संस्कृति का प्रदर्शन नहीं, बल्कि प्रकृति और वन्य जीवन के संरक्षण का संदेश भी देता है। यह हमें हमारी जड़ों से जोड़ने के साथ-साथ पर्यावरण के प्रति जागरूक रहने की प्रेरणा भी देता है। आज के आधुनिक दौर में, जब पारंपरिक कलाएं धीरे-धीरे विलुप्त होती जा रही हैं, सिंहटू नृत्य जैसी विरासत हमें अपनी सांस्कृतिक पहचान को संजोकर रखने का संदेश देती है। यह नृत्य न केवल सिरमौर की शान है, बल्कि पूरे हिमाचल प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर का एक अनमोल हिस्सा है।

कौन बनेगा करोड़पति जैसे बड़े मंच पर इस नृत्य का जिक्र होना इस बात का प्रमाण है कि हिमाचल की लोक संस्कृति अब केवल क्षेत्रीय सीमाओं तक सीमित नहीं रही, बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना रही है। सिरमौर का ‘सिंहटू’ एक बार फिर सुर्खियों में हैऔर यह साबित कर रहा है कि हमारी लोक परंपराएं समय के साथ और भी मजबूत होकर उभर रही हैं।

--Advertisement--
--Advertisement--

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

--Advertisement--

Popular

More like this
Related

दर्दनाक हादसा, सड़क धंसने से 300 फीट गहरी खाई में गिरी पिकअप; एक युवक की मौत

चम्बा - भूषण गुरुंग चंबा जिले के भरमौर के थल्ला...

सात से पहले आएगा पंचायत रोस्टर, एक सप्ताह तक चुनाव आचार संहिता लगने का अनुमान

हिमखबर डेस्क हिमाचल में पंचायती राज चुनाव के लिए अब...