
दुराना- राजेश कुमार
पूर्व पंचायत समिति सदस्य एवं वर्तमान उपप्रधान पंचायत डोल भटहेड़ साधू राम राणा ने प्रेस वार्ता में कहा कि बजट में पंचायत सदस्यों के मानदेय को लेकर शुरू से ही कोई तवज्जो किसी भी सरकार द्वारा नहीं दी गई है। पंचायत सदस्यों के मानदेय को रुपए तीन सौ प्रति पंचायत मीटिंग से जोड़ कर दिया जाना सरा सर पंचायत सदस्यों के साथ अन्याय है।
क्योंकि वर्तमान में देखा जाए तो पंचायत सदस्यों को पंचायत मीटिंग के इलावा और भी बहुत से कार्य पंचायत गतिविधियों को सुचारू रूप से चलाने को लेकर करने पड़ते हैं।हाल ही में मनरेगा कार्यों में दो समय की हाजरी अपने टच मोबाइल एप के माध्यम से लगाने की जिम्मेदारी भी पंचायत सदस्यों को सौंपी गई है।
जिसके कारण पंचायत सदस्यों को महंगे मोबाइल फोन खरीदने के साथ हर रोज पंचायत में चल रहे कार्य पर मौके पर लेबर की दो समय की हाजरी लगाने केलिए अपनी उपस्थिति दर्ज करना अनिवार्य की गई है। इसलिए अपने वार्ड के अन्य विकास कार्यों को करवाने की व्यवस्था का जिम्मा भी पंचायत सदस्यों को सौंपा जाता है और तो और कोरोना काल में भी हर पंचायत सदस्य अपने अपने वार्ड की कोरोना संबंधी जानकारी की सूचना एकत्र करने केलिए अपनी विषेश भुमिका निभाते रहे हैं।
लेकिन फिर भी पंचायत सदस्यों को मिलने वाला मानदेय केवल निर्धारित पंचायत मीटिंगों में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने पर नाम मात्र दिया जाना किसी भी ओर से तर्क संगत नहीं है। सरकारी आदेशों अनुसार वार्ड में उप ग्राम सभाओं का आयोजन भी पंचायत वार्ड मैंबर्स की जिम्मेदारी होती है और वैसे भी राजनीति दृष्टि से देखा जाए तो पंचायत सदस्य का चुनाव जीतना अन्य सभी चुनावों से काफी मुश्किल है ।
अतः इस आधार पर पंचायत सदस्यों को प्रति माह मिलना वाला मानदेय दो हजार दिए जाने की मांग माननीय पंचायती राज मंत्री एवं माननीय मुख्यमंत्री जी से की जाती है ताकि पंचायत सदस्यों को भी सम्मानजनक मानदेय राशि मिल सके।
