घणाहट्टी प्राथमिक स्कूल: बिना हाथ धोए मिड-डे मील खाते मिले बच्चे, चावल में घुन, थाली में सब्जी कम

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हिमखबर डेस्क

हिमाचल प्रदेश के प्री-प्राइमरी स्कूलों में मिड-डे मील की व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर लापरवाही सामने आई है। सोमवार को राज्य खाद्य आयोग के अध्यक्ष की ओर से किए गए निरीक्षण में यह पाया गया कि नर्सरी और केजी के छोटे बच्चे बिना हाथ धोए ही मिड-डे मील खा रहे हैं। खाने की व्यवस्था में साफ सफाई का ध्यान नहीं रखा जा रहा, जिससे बच्चों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा पैदा हो सकता है।

राज्य खाद्य आयोग के अध्यक्ष ने शिमला के घणाहट्टी प्राथमिक स्कूल में निरीक्षण के दौरान मिड-डे मील की गुणवत्ता भी संतोषजनक नहीं पाई। मिड-डे मील में न तो पोषण मानकों का पालन किया जा रहा था और न ही अनिवार्य सब्जियां परोसी जा रही थीं, यहां तक की बच्चों के लिए बनाए जाने वाले चावल में घुन (काले छोटे कीड़े) लगा था।

राज्य खाद्य आयोग ने पाया कि प्री प्राइमरी स्कूल में खाद्य सुरक्षा से जुड़े मानकों और दिशा-निर्देशों की भी खुलकर अनदेखी की जा रही है। निरीक्षण में पाया गया कि नर्सरी और केजी के बच्चों के लिए आया या सहायक उपलब्ध नहीं थी। बच्चों को हाथ धुलवाने, भोजन कराने या शौचालय ले जाने में कोई सहायता नहीं मिल रही थी। मानकों के तहत केजी और नर्सरी के छोटे बच्चों की उम्र और आवश्यकता को देखते हुए अनिवार्य तौर पर आया की सुविधा उपलब्ध होनी चाहिए।

डॉ. एसपी कत्याल, अध्यक्ष, राज्य खाद्य आयोग के बोल

प्री प्राइमरी स्कूलों में छोटे बच्चों के लिए आया या सहायिका की सुविधा उपलब्ध नहीं है जबकि आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों के लिए सहायिका के पद सृजित हैं। प्री प्राइमरी स्कूलों की इस व्यवस्थागत खामी से सरकार को अवगत करवाया जाएगा। मिड-डे मील में परोसे जा रहे भोजन की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

मिड-डे मील की खरीद का रिकाॅर्ड रखना जरूरी नहीं

निरीक्षण के दौरान खाद्य आयोग की टीम ने जब स्कूल प्रबंधन से मिड-डे मील के लिए खरीदी जाने वाली सामग्री का रिकाॅर्ड मांगा तो बताया गया कि लिखित निर्देश जारी हुए हैं, जिसके तहत खरीद का रिकाॅर्ड नहीं रखना है। इस पर आयोग के अध्यक्ष डॉ. एसपी कत्याल ने हैरानी जताई और सरकार के माध्यम से मामले की जांच की बात कही।

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