जिंदगी का आखिरी मुकाबला, कुश्ती लड़ते हुए पहलवान की मौत, होमगार्ड का जवान था मृतक

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हिमखबर डेस्क

हिमाचल प्रदेश के उपमंडल बड़सर के तहत मक्कड़ छिंज मेले में कुश्ती मुकाबले के दौरान एक दुखद घटना घटी। 56 वर्षीय होमगार्ड जवान और अनुभवी पहलवान उधम सिंह की कुश्ती के दौरान अचानक तबीयत बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें तुरंत भोटा पीएचसी अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस घटना के बाद पूरे मेले में मातम छा गया।

घटना मक्कड़ में आयोजित वार्षिक दंगल के दौरान हुई, जहां उधम सिंह अपनी कुश्ती लड़ रहे थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मुकाबले के दौरान वह अचानक लड़खड़ा गए। पहले तो दर्शकों और आयोजकों को लगा कि वह थकान के कारण सुस्त हो गए हैं, लेकिन जब उनकी हालत और बिगड़ने लगी, तो उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाने का निर्णय लिया गया।

उधम सिंह हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले के गलोड़ क्षेत्र के ढुडाणा गांव के निवासी थे। वह वर्ष 1996 से होमगार्ड जवान के रूप में सेवाएं दे रहे थे और पिछले 40 वर्षों से पहलवानी में सक्रिय थे। उनका कुश्ती के प्रति गहरा लगाव था और उन्होंने कई प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया था। रविवार को मक्कड़ दंगल में भी उन्होंने अपने अनुभव और जोश के साथ मुकाबला किया, लेकिन दुर्भाग्यवश यह उनकी आखिरी कुश्ती साबित हुई।

घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और आवश्यक जांच शुरू की। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही उधम सिंह की मौत के सही कारणों का पता चल पाएगा। हालांकि, प्राथमिक जांच में हृदय गति रुकने (हार्ट अटैक) की आशंका जताई जा रही है।

इस दुखद घटना पर जिला होमगार्ड कमाडेंट विनय कुमार ने शोक व्यक्त करते हुए कहा कि होमगार्ड बटालियन ने एक अनुभवी और समर्पित सदस्य खो दिया है। उधम सिंह न केवल अपनी सेवाओं में समर्पित थे, बल्कि वे एक कुशल पहलवान भी थे, जो अपनी फिटनेस और मेहनत के लिए जाने जाते थे।

एसपी हमीरपुर भगत सिंह ठाकुर के बोल

एसपी हमीरपुर भगत सिंह ठाकुर ने भी इस घटना पर शोक जताया और बताया कि पुलिस मामले की छानबीन कर रही है। उन्होंने कहा कि शव को पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंप दिया गया है। इस अप्रत्याशित घटना ने पूरे क्षेत्र को गमगीन कर दिया है।

उधम सिंह की आकस्मिक मृत्यु ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। उनका योगदान हमेशा याद रखा जाएगा, और उनकी पहलवानी की विरासत लंबे समय तक लोगों के दिलों में जीवित रहेगी।

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