हिमाचल: पुलिस पर युवकों की पिटाई का आरोप, एक के कान का फटा पर्दा, नहीं दर्ज हुई FIR

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पुलिस पर युवकों की पिटाई का आरोप, एक के कान का फटा पर्दा, नहीं दर्ज हुई FIR

नाहन, 20 जून – नरेश कुमार राधे

खाकी पर तीन युवकों की बेरहमी से बेवजह मारपीट का आरोप है। मामला, इस कारण संगीन हो गया है, क्योंकि एक युवक के कान का पर्दा फटा है।

आईजीएमसी शिमला ने  युवक को 6 माह के आब्जर्वेशन पर रखा है। इसके बाद ही पता चलेगा कि क्या पीड़ित युवक इस कान से सुन पाएगा या नहीं।

शुरुआती समय में युवाओं को इस बात का इल्म नहीं हुआ कि बेरहमी से पीटने वाले पुलिसकर्मी हैं। इसका खुलासा अगले दिन हुआ। घटना, 14 दिन पुरानी है। इसके बाद से ही तीन पीड़ित युवक न्याय की गुहार लगा रहे हैं।

स्थानीय स्तर पर सुनवाई न होने पर पीड़ित पक्ष ने आईजी को शिकायत पत्र लिखा है। इसके मुताबिक 22 वर्षीय अजय शर्मा, 23 वर्षीय राजन व 21 वर्षीय पंकज कुमार शिमला रोड स्थित पैट्रोल पंप के नजदीक 6 जून की रात साढ़े 10 बजे पैरापिट पर बैठे हुए थे।

इस दौरान नाहन की तरफ से आई बोलेरो (एचपी18ए-6236)  में से 5-6 लोग साधारण कपड़ों में उतरे। अचानक ही तलाशी लेने लगे साथ ही मोबाइल भी छीन लिए गए।

युवकों का आरोप है कि एक पुलिस कर्मी ने तीनों के सिर, गर्दन, चेहरे व कान पर जोर से कई थप्पड़ मारे। साथ ही मार पिटाई भी की। युवकों का कहना है कि इसके बाद गुन्नुघाट चौकी में शिकायत पत्र दिया गया।

लेकिन उन्हें बताया गया कि ये इलाका चौकी क्षेत्र में नहीं आता है, थाना में रिपोर्ट करो। 7 जून की सुबह जब हम (युवक) थाना पहुंचे तो पाया कि वही बोलेरो थाना के बाहर खड़ी थी।

इस दौरान पता चला कि मार पिटाई करने वाला पुलिस विभाग में हैड कांस्टेबल के पद पर कार्यरत है। थाना से युवकों को मेडिकल कॉलेज भेजा गया। मेडिकल कॉलेज से अजय शर्मा के कान में मार पिटाई के कारण छेद पाया गया।

अजय व राजन को आईजीएमसी शिमला रैफर किया गया। 9 जून 2023 को मेडिकल में अजय शर्मा के कान का पर्दा फटना बताया गया। शिकायत पत्र में कहा गया है कि अब तक हैड कांस्टेबल राकेश के खिलाफ कार्रवाई अमल में नहीं लाई गई है।

आरोप ये भी है कि हैड कांस्टेबल द्वारा लगातार धमकियां दी जा रही हैं कि अगर शिकायत वापस नहीं ली गई तो तीनों को झूठे केस में फंसा दिया जाएगा। युवकों ने सुरक्षा प्रदान करने की भी मांग की है। आरोप में हैड कांस्टेबल को पुलिस अधीक्षक का करीबी भी बताया गया है।

इसी बीच एक पीड़ित युवक ने एमबीएम न्यूज़ से फ़ोन पर बातचीत में कहा कि अगर वो गलत होते तो रात को क्यों गुन्नुघाट चौंकी रिपोर्ट लिखवाने जाते। राजन ने कहा कि रात को ही उन्होंने अपना मेडिकल करवाने की मांग भी रखी थी।

उधर, इस संवेदनशील मामले में सिरमौर पुलिस अधीक्षक रमन मीणा से संपर्क करने का प्रयास किया गया। हर बार की तरह इस बार भी पुलिस अधीक्षक ने फोन कॉल रिसीव नहीं की। करीब दो घंटे तक कॉल बैक का भी इंतजार किया गया।

इसी बीच पुलिस अधीक्षक कार्यालय में एक अन्य अधिकारी से भी बात की, उनका कहना था कि इस मामले में पुलिस अधीक्षक के स्तर पर ही प्रतिक्रिया दी जा सकती है। खैर, आरोपी हैड कांस्टेबल या पुलिस विभाग की प्रतिक्रिया मिलने की स्थिति में प्रकाशित की जाएगी।

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