शिमला – नितिश पठानियां
हिमाचल में मार्च के अंत तक सवा पांच करोड़ लीटर शराब बिक्री का अनुमान है। राज्य सरकार ने बीते साल अप्रैल में लागू हुई नई एक्साइज पॉलिसी में इस लक्ष्य को तय किया था।
राज्य में शराब बिक्री का यह न्यूनतम गारंटीकृत कोटा है और इसे हर हाल में पूरा करना होगा। इतनी शराब बिक्री से सरकार को 2700 करोड़ रुपए का राजस्व हासिल होगा।
इस लक्ष्य पर आगामी वित्तीय वर्ष के लिए नई पॉलिसी भी तैयार की जाएगी और इस पॉलिसी को अप्रैल महीने से लागू किया जाएगा।
फिलहाल आबकारी कराधान विभाग अपने तय कोटे के नजदीक पहुंच चुका है और 31 मार्च को सामने आने वाले आंकड़ों में हिमाचल में शराब बिक्री पांच करोड़ लीटर को पार कर जाएगी।
आबकारी कराधान विभाग ने मौजूदा वित्तीय वर्ष के लिए बीते साल मार्च में जो पॉलिसी तैयार की थी। उसमें तीन करोड़ लीटर देशी शराब और दो करोड़ 24 लाख लीटर अंग्रेजी शराब की बिक्री का लक्ष्य तय किया गया था।
अंग्रेजी शराब की बिक्री के मामले में पहले तीन जिलों में कांगड़ा, शिमला और कुल्लू काबिज हैं। इनमें राज्य के सबसे बड़े जिला कांगड़ा में आबकारी विभाग ने मौजूदा वित्तीय वर्ष में 34 लाख 28 हजार 88 लीटर शराब बिक्री का लक्ष्य तय किया था और फरवरी तक विभाग इस लक्ष्य के 90 फीसदी के करीब पहुंच गया है।
प्रदेश की राजधानी शिमला में 31 लाख 68 हजार 977 लीटर अंग्रेजी शराब बेचने का लक्ष्य तय किया गया था, जबकि कुल्लू जिला के लिए यह लक्ष्य 27 लाख 43 हजार 993 लीटर का था।
गौरतलब है कि आबकारी विभाग ने बीते साल तय की गई एक्साइज पॉलिसी में न्यूनतम गारंटी कोटा के तहत यह लक्ष्य तय किया है और ठेकेदारों के लिए एक साल में इतनी शराब बेचना अनिवार्य है।
पॉलिसी को 11 महीने गुजर चुके हैं और जिन जिलों में शराब बिके्रेता न्यूनतम कोटे तक नहीं पहुंच पाए हैं, उनके आबकारी विभाग कार्रवाई कर सकता है।
देशी शराब की बात करें, तो कांगड़ा में 52 लाख 27 हजार 870 लीटर, शिमला में 40 लाख 41 हजार 266 लीटर और मंडी में 31 लाख 60 हजार लीटर शराब बिक्री का लक्ष्य तय किया गया था।
आबकारी कराधान विभाग ने इस पॉलिसी में यह भी तय किया है कि शराब विक्रेताओं को हर हाल में न्यूनतम गारंटीकृत कोटा हर हाल में उठाना होगा। ऐसे में यह साफ है कि 31 मार्च तक राज्य में देशी और अंग्रेजी शराब के तय सवा पांच करोड़ लीटर कोटे की बिक्री होगी।
सरकार देगी मंजूरी
आबकारी कराधान विभाग राज्य सरकार से मंजूरी के बाद आगामी वित्त वर्ष के लिए इन्हीं आंकड़ों के आधार पर न्यूनतम कोटा तय करेगा और पॉलिसी में शामिल कर इसे लागू किया जाएगा। हालांकि इसके लिए विभाग को कैबिनेट में पालिसी फ्रेम करने की मंजूरी लेनी है।
सरकार ही यह तय करेगी कि आगामी वित्त वर्ष में शराब के ठेकों की नीलामी का आधार क्या होगा और विभाग सरकार से ग्रीन सिग्नल का इंतजार कर रहा है।