नोटिस में न तो किसी की मुहर और न ही किसी के हस्ताक्षर से टेंशन में प्रभावित दुकानदार
शाहपुर – नितिश पठानियां
शाहपुर में व्यवसायियों के सितारे गर्दिश में हैं, जिन्हें आए दिन कोई न कोई डांस झेलना पड़ रहा है। इस कारण उन्हें नई-नई मुसीबतों से रू-ब-रू होना पड़ रहा है। शाहपुर में स्थित खसरा नंबर 1412 के तहत आने वाली करीब 30 दुकानों का अभी मुआवजा अदा नहीं किया गया है, जिनका केस माननीय उच्च न्यायालय शिमला में चला हुआ है। जिस कारण अभी तक इन दुकानदारों, दुकानों के मालिकों को अभी तक सरकार द्वारा मुआवजा राशि अदा नहीं की गई है और आए दिन इनके ऊपर नए-नए फरमान जारी कर दिए जा रहे हैं।
सबसे पहले तो एनएचएआई के स्थानीय कर्मचारियों द्वारा जो निशान दुकानों में लगाए गए थे, उन्हें दूसरी कंपनी द्वारा बदलकर और आगे कर दिया, जिस कारण असमंजस में रहे दुकानदारों ने प्रशासन से गुहार लगाकर दोनों एजेंसियों को एक साथ बुलाकर निशान पक्के निशान लगवाएं।
इसके बावजूद अब उक्त खसरा के दुकानदारों को सरकार द्वारा नोटिस दिया गया है, जिसमें न तो किसी की मुहर है और न ही किसी के हस्ताक्षर हैं, उसमें सिर्फ इन दुकानदारों को तीन दिन के भीतर दुकानें खाली करने का फरमान जारी किया गया है, जिस कारण दुकानदारों में हाय-तौबा मची हुई है। नोटिस में साफ लिखा है कि अगर आप तीन दिन के भीतर अमल नहीं करते हैं, तो कंपनी द्वारा आपके भवन को गिराया जाएगा इसके लिए आप स्वयं जिम्मेदार होंगे।
व्यवसायी कमल पाधा के बोल
इस फरमान को शाहपुर के प्रसिद्ध व्यवसायी कमल पाधा ने तुगलकी फरमान बताया है। उनका कहना है कि आए दिन कंपनी तथा सरकार उजड़ चुके व्यवसायियों को बसाने की बजाय उनके जख्मों पर नमक छिडक़ रही है। मैं कई बार भूमि की निशानदेही करवरकर उसका ततीमा इनसे मांग चुका हूं, परंतु यह मेरे को इतना ही बताते हैं कि आपकी 8 स्केयर मीटर भूमि गई है तथा उसका ततीमा आज तक मेरे को नहीं दिया गया। उन्होंने सरकार से गुहार लगाई है कि शाहपुर के उजड़ चुके व्यवसायियों की पीड़ा को ध्यान में रखते हुए उन्हें प्रताडि़त करने के बजाय उन्हें बसाने का प्रयास करें।

