रिवालसर स्कूल से निकाले मिड डे मील वर्करों के बारे में रिपोर्ट तलब, डिप्टी डायरेक्टर ने यूनियन की मांग पर की कार्यवाई
मंडी – अजय सूर्या
रिवालसर केंद्रीय प्राथमिक विद्यालय से स्कूल प्रबंधन समिति द्धारा गैर कानूनी तौर पर एक साथ निकाले गए तीन मिड डे मील वर्करों का मामला मीडिया में सार्वजनिक होने के बाद उपनिदेशक मंडी हरक़त में आ गए हैं।
गौरतलब है कि एसएमसी द्धारा 9 जून को तीनों वर्करों को एक साथ निकाल दिया था और स्कूल में नई भर्ती प्रक्रिया के लिए आवेदन आमंत्रित कर दिये गए थे और पिछले दस दिनों से स्कूल में खाना अविवावकों ने बनवाया जा रहा है। लेकिन सीटू से सबंधित मिड डे मील वर्करज यूनियन ने 13 जून को उपनिदेशक शिक्षा विभाग मंडी को माँगपत्र सौंपा था।
जिसमें एसएमसी के फ़ैसले को गैर कानूनी बताया था और ये भी बताया था कि इन वर्करों को ग़लत तरीके से निकाला गया है। जबकि निकाले गए दो वर्कर 2004 से इस स्कूल में बच्चों को खाना बनाने का कार्य ईमानदारी से करते रहे हैं और इनका काम अब तक संतोषजनक था।
लेकिन पिछले एक साल से इन्हें निकालने की योजना एसएमसी अध्यक्ष और मुख्याध्यापक बना रहे थे और इनकी जगह अपने चेहतों को यहां लगाना चाहते हैं, जिसके लिए उन पर बार बार झूठे आरोप लगाये जाते थे।
इन वर्करों को नालियां साफ़ करने सभी अधयापकों और उनके जानने वालों को बच्चों का खाना खिलाने और कुकिंग के अलावा अन्य काम करने के लिए दबाब डाला जाता था।
यही नहीं महिला मिड डे मील वरकरों ने उनके साथ दुर्व्यवहार करने की शिकायत गत दिसंबर माह में इन वर्करों ने एसएमसी प्रधान के पास दर्ज कराई थी। लेकिन उनकी शिकायत पर कोई कार्यवाई न करके उल्टा वर्करों को ही नॉकरी से निकाल दिया गया।
यूनियन की मांग पर अब उपनिदेशक ने स्कूल प्रबंधन समिति को पत्र लिखकर इस विवाद को जल्दी समाप्त करने के लिए 19 जून को निर्देश दिये हैं।
सीटू के ज़िला अध्यक्ष एवं राज्य श्रमिक कल्याण बोर्ड के सदस्य भूपेंद्र सिंह, महासचिव राजेश शर्मा, गुरुदास वर्मा, इंद्र सिंह, सन्तोष कुमारी इत्यादि ने स्कूल प्रबंधन समिति से इन सभी वरकरों को दोबारा नियुक्त करने की मांग की है और यदि ऐसा नहीं किया गया तो यूनियन हाईकोर्ट में केस करेगी और स्कूल प्रबंधन समिति और मुख्य अध्यापक के ख़िलाफ़ प्रदर्शन भी करेगी।

