हिमखबर डेस्क
बीड बिलिंग से उड़ान भरने के पश्चात महिला पायलट की दुर्घटना में मौत व कुछ अन्य पायलटों की क्रैश लैंडिंग के कारण सुर्खियों में आए बीड़ बिलिंग में राष्ट्रीय पैराग्लाइडिंग स्कूल का संचालन न होने पर नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने प्रश्न खड़ा किया है।
पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि बीड़ बिलिंग के राष्ट्रीय पैराग्लाइडिंग स्कूल का उद्घाटन होने के 9 महीने बाद भी बंद पड़ा है। जहां पर सैंकड़ों बच्चे हर साल ट्रेनिंग लेकर ट्रेंड पैराग्लाइडिंग पायलट बन सकते थे, वह संस्थान सरकार की नाकामियों और राज्य सरकार के विभिन्न विभाग के बीच तालमेल की कमी की भेंट चढ़ चुका है।
केंद्र सरकार की स्वदेश दर्शन योजना के तहत पूर्व सरकार द्वारा 8 करोड़ की लागत से राष्ट्रीय पैराग्लाइडिंग स्कूल का बीड़ बिलिंग में निर्माण किया गया था। इसका उद्घाटन भी मुख्यमंत्री द्वारा 25 जनवरी 2025 को किया जा चुका है।उद्घाटन में डेढ़ साल से ज्यादा की देरी के बाद भी यह स्कूल संचालित नहीं हो पाया है।
मेरा सुख की सरकार और मुख्यमंत्री से आग्रह है कि एशिया के पहले नैशनल पैराग्लाइडिंग स्कूल का संचालन सरकार अंतर्राष्ट्रीय मानकों और नियमों के अनुसार करे, जिससे यहां से प्रशिक्षित होकर जाने वाले पायलट के लाइसैंस को पूरी दुनिया के विभिन्न संगठन मान्यता दें।
जयराम ठाकुर ने कहा कि बीड़ बिलिंग को क्रॉस-कंट्री पैराग्लाइडिंग के लिए दुनिया के सबसे सुरक्षित स्थलों में से एक माना जाता है और इसे अपनी अंतर्राष्ट्रीय प्रतिष्ठा के अनुरूप संस्थागत समर्थन की आवश्यकता है। हिमाचल में राज्य-स्तरीय महासंघ और अंतर्राष्ट्रीय पायलट प्रवीणता सूचना लाइसैंस जारी करने हेतु अधिकृत निकाय की स्थापना न होने के कारण भारत में पायलट प्रमाणन और प्रशिक्षण का लाइसैंस देने पर रोक है।
इसकी वजह से दशकों से भारत को पैराग्लाइडिंग के खेल में मान्यता के लिए संघर्ष करना पड़ता है। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि राष्ट्रीय वायु खेल दिशा-निर्देश 2023 के साथ, पैराग्लाइडिंग को जिम्मेदारी से बढ़ावा देने के लिए अब नियामक ढांचा मौजूद है।
सरकार यदि गाइडलाइंस को मानते हुए काम करे और अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप कार्य करते हुए पैराग्लाइडिंग के स्कूल चलाने की दिशा में काम करे तो न सिर्फ राष्ट्रीय पैराग्लाइडिंग स्कूल हर साल सैंकड़ों प्रशिक्षित पायलट तैयार कर उन्हें राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप लाइसैंस प्रदान करेगा बल्कि निजी क्षेत्र में भी स्कूल खोले जाने के अवसर बनेंगे।
इसके लिए निजी क्षेत्र में भी पैराग्लाइडिंग स्कूल खोलने से संबंधित दिशा-निर्देश सरकार को बनाने चाहिए। जिससे एयरो स्पोर्ट्स के क्षेत्र में हिमाचल प्रदेश नए आयाम स्थापित कर सकता है। इसलिए लाइसैंसिंग को औपचारिक रूप देने के लिए एयरो क्लब ऑफ इंडिया (एसीआई) और हिमाचल प्रदेश सरकार के बीच तत्काल समन्वय स्थापित किया जाए।
जयराम ठाकुर ने कहा कि सरकार नैशनल पैराग्लाइडिंग स्कूल के अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुसार संचालित करने, अंतर्राष्ट्रीय लाइसैंसिंग प्रक्रिया को पूरा कर मानकीकृत लाइसैंस देने से प्रदेश में पैराग्लाइडिंग के प्रशिक्षण के क्षेत्र में अपार संभावनाएं पैदा होंगी। इससे न सिर्फ उस क्षेत्र की सूरत बदलेगी बल्कि हजारों की संख्या में लोगों को रोजगार मिलेगा। करोड़ों का राजस्व हर वर्ष प्रदेश को प्राप्त होगा।
सरकार को पाठ्यक्रम शुल्क और उपकरणों की बिक्री पर जीएसटी से राज्य को लाभ होगा। कांगड़ा, मंडी समेत प्रदेश की पर्यटन और अर्थव्यवस्था को लाभ होगा। लाइसैंस प्राप्त और उचित रूप से प्रशिक्षित पायलट अंतर्राष्ट्रीय आयोजनों में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। इससे हिमाचल भर में टैंडम संचालन के सुरक्षा मानकों में भी सुधार होगा।

