मकर संक्रांति पर क्यों बनाई जाती है खिचड़ी, आक्रमणकारी खिलजी से है कनेक्शन

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शाहपुर – नितिश पठानियां

मकर संक्रांति पर्व पर सुबह उठकर स्नानादि करके पूजा-अर्चना उपरांत खिचड़ी खाने का विशेष महत्व है। इस दिन लोग सुबह ही खिचड़ी खाते हैं तथा अपने रिश्तेदारों व सगे-संबंधियों में खिचड़ी बांटते हैं।

शाहपुर के ज्योतिषी आचार्य पंडित अमित कुमार शर्मा ने बताया कि मकर संक्रांति को खिचड़ी खाने का विशेष महत्व है। उन्होंने बताया कि इस दिन जो खिचड़ी बनाई जाती है उसमें चाबल, उड़द की दाल, हल्दी, हरी सब्जी व घी मिलाया जाता है तथा प्रत्येक खाद्य पदार्थ का किसी न किसी ग्रह से संबंध होता है।

आचार्य पंडित अमित कुमार शर्मा ने बताया कि खिचड़ी में इस्तेमाल होने वाले चावल का संबंध चंद्रमा से होता है। खिचड़ी में डाली जाने वाली उड़द की दाल का संबंध शनिदेव, काली दाल का संबंध राहु व केतु से, हल्दी का संबंध गुरु देव से और हरी सब्जियों का संबंध बुध देव से माना गया है।

इसके अलावा खिचड़ी में घी का संबंध सूर्य देव से होता है। इसलिए मकर संक्रांति की खिचड़ी को बेहद खास माना जाता है।

खिचड़ी खाने की शुरुआत

मकर संक्रांति पर खिचड़ी क्यों बनाई जाती है, इसके पीछे एक दिलचस्प कहानी है। एक पौराणिक कथा के अनुसार जब भारत पर खिलजी का आक्रमण हुआ था, तब युद्ध के कारण लोग ठीक से खाना नहीं खा पा रहे थे। लोग धीरे-धीरे कमजोर हो रहे थे, तब गुरु गोरखनाथ ने एक उपाय बताया।

उन्होंने कहा कि दाल, चावल और सब्जियां मिलाकर एक साथ पकाई जाएं, जिससे सभी का पेट भर जाए और यह खाना बनाना भी आसान हो।

जब युद्ध खत्म हुआ, तो गुरु गोरखनाथ और उनके साथियों ने मकर संक्रांति के दिन इस खिचड़ी को तैयार किया, बांटा और इसे खिचड़ी का नाम दिया। तब से यह परंपरा बन गई कि मकर संक्रांति पर खिचड़ी बनाई जाती है।

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