
केंद्र की ओर से जारी रिपोर्ट में खुलासा; 30 फीसदी स्कूलों में ही व्यवस्था, कैसे पूरा होगा ऑनलाइन पढ़ाई का सपना
शिमला – नितिश पठानियां
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत केंद्र सरकार का सपना है कि सरकारी स्कूलों में भी बच्चों को प्राइवेट स्कूलों की तर्ज पर सभी तरह की सुविधा मिले, ताकि सरकारी स्कूल पीछे न रहें, लेकिन राज्य के सरकारी स्कूल इस सपने से अभी कोसों दूर हैं।
कारण यह कि कोविड जैसे भयानक दौर से गुजरने के बाद राज्य के सरकारी स्कूल अभी भी इंटरनेट सुविधा बच्चों को नहीं दे सके हैं। केंद्र की ओर से जारी की गई यू-डाइज की रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है।
आंकड़ों की मानें, तो प्राइमरी और मिडल स्कूल में सबसे ज्यादा कमी इंटरनेट फैसेलिटी की है। राज्य में कुल 10555 प्राइमरी स्कूलों में से केवल मात्र 206 स्कूलों में ही ऑनलाइन पढ़ाई की सुविधा उपलब्ध है। यही हाल मिडल स्कूलों का है।
यहां पर भी कुल 1949 स्कूलों में केवल 420 स्कूलों में ही इंटरनेट की सुविधा बच्चों को दी जा रही है। इसके साथ ही यदि हाई स्कूलों की बात की जाए, तो यहां पर भी 933 स्कूलों में 451 और सीनियर सेकेंडरी स्कूलों में 1876 में से 1667 स्कूलों में इंटरनेट की सुविधा है।
इसमें सबसे ज्यादा इंटरनेट की कमी वाले स्कूल जनजाति एरिया पांगी, चंबा और स्पीति के हैं, जहां सबसे ज्यादा दिक्कत है। बड़ा सवाल यह है कि बर्फबारी के समय जब बच्चों की पढ़ाई ऑनलाइन करवानी होती है, तो कैसे हर घर पाठशाला का सिलेबस इन बच्चों तक पहुंच पाएगा। आने वाले समय में सरकार को इस समस्या के बारे में गंभीरता से सोचने की जरूरत है।
