मंडी – अजय सूर्या
हिमाचल प्रदेश के मंडी जिला के सदर विकासखंड की ग्राम पंचायत पडोह की निवासी चिंता शर्मा महिलाओं के लिए एक प्रेरणा का विषय है। अप्पर पडोह गांव में एक अत्यन्त निर्धन परिवार में चिंता की शादी वर्ष 1995 में नरेंद्र कुमार से हुई। वर्ष 2011 में पति की दुखद मौत हो गई। तब से चिंता के घर में “चिंताओं” का बसेरा हो गया था।
इकलौते बेटे की परवरिश और पढ़ाई ऊपर से गरीबी कैसे गुजारा करेगी। दुःख में भी चिंता ने आगे बढ़ने का संकल्प लिया और परिश्रम को अपना हथियार बनाकर दिन-रात मेहनत में जुट गई। वे स्वयं सहायता समूह में शामिल हुई। साथ ही मनरेगा में मजदूरी, रात को सिलाई करती।
सरकारी स्कूल में एमडीएम वर्कर बनीं। सद्व्यवहार व ईमानदारी ने इसे डाकघर में “छोटी बचत”- एजेंट बनाया। फिर चिंता ने दो अच्छी नस्ल की गाय खरीद ली। अब हर रोज़ 20 लीटर दूध बेचती है। मानो जैसे परमात्मा ने चिंता को हुनर की देवी बनाकर कर भेजा है।
ऑर्डर मिलने पर रात को स्वादिष्ट कचौड़ियां भी बनाती है। विवाह-शादियों के साथ पार्टियों के बड़े- बड़े आर्डर मिलते है। इसी मेहनत के साथ तरक्की के चलते चिंता शर्मा ने अपना नया मकान भी बना लिया है। इनका इकलौता बेटा हितेश भी इनके काम में इनकी पुरी मदद करता है।
अप्रैल में बेटे की शादी तय हुई है। चिंता शर्मा हर महीने अब अच्छी आजीविका कमा लेती है। निश्चित रूप से चिंता ने एक नया अध्याय लिखा है जो महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने को प्रेरित करता रहेगा।

