तीन दिवसीय राज्यस्तरीय जनजातीय नृत्य, हस्तशिल्प प्रतियोगिता मरगुल उत्सव का हुआ शुभारंभ

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व्यूरो रिपोर्ट

तीन दिवसीय राज्यस्तरीय जनजातीय नृत्य , हस्तशिल्प प्रतियोगिता मरगुल उत्सव का शुभारंभ किया गया ।
मृकुला माता जी के मन्दिर में पारंपरिक पूजा अर्चना के बाद, शोभा यात्रा के रूप में विभिन्न सांस्कृतिक दलों के साथ उत्सव स्थल तक पहुंचे।

विभिन्न विभागों, महिलमण्डल तथा स्वयं सहायता समूहों द्वारा लगाए गए स्टालों एवं प्रदर्शनियों का अवलोकन करने के पश्चात हमने विधिवत दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।

इस त्रिदिवसीय ‘मरगुल उत्सव’ में जनजातीय लोकनृत्य की राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में लाहौल, स्पिति, किन्नौर, नृत्य दलों द्वारा प्रस्तुत जनजातीय संस्कृति दर्शन होंगे तथा साथ ही क्राफ्ट मेले के अंतर्गत जनजातीय कला एवं क्राफ्ट के भी दर्शन होंगे।

मरगुल उत्सव में फोटोग्राफी प्रतियोगिता, पारम्परिक परिधान प्रतियोगिता का आयोजन किया जा रहा है। इस तरह के आयोजन से ज़िले में न केवल पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा जिससे लोगों की आर्थिकी भी बेहतर होगी बल्कि पर्यटकों को जनजातीय क्षेत्रों की समृद्ध संस्कृति को जानने का अवसर भी मिलेगा।

मरगुल उत्सव के पहले दिन आज राज्यस्तरीय नृत्य में महिलमण्डल काजा के अतिरिक्त, पारंपरिक श्रेणी नृत्य तथा जिलास्तरीय नृत्य की प्रस्तुतियां आकर्षण का केंद्र रही जिनमें महिला मंडल हिंसा, जाहलमा, बारिंग, थिरोट, मुरिंग,आगाहर, छाटिंग, करपट, कुकुमसेरी, सलपट, कोराकी, बरोड़ ने कार्यक्रम प्रस्तुत किये।

इसके अलावा ‘होमगार्ड के बैंड’ तथा ‘पुलिस बैंड हारमनी ऑफ पाइनस’ ने भी खूबसूरत प्रस्तुति दी। पारम्परिक स्वागत करने वाले महिलमण्डल को पांच-पांच हज़ार, व स्टाल लगाने वाले प्रत्येक महिलमण्डल को 15 हज़ार दिए जाएगें।

राज्यस्तरीय जनजातीय नृत्य , हस्तशिल्प प्रतियोगिता ‘मरगुल उत्सव’ के दूसरे दिन, रस्साकशी, बुनाई प्रतियोगिता सहित राज्यस्तरीय नृत्य प्रतियोगिता के कार्यक्रम आयोजित किए गए।

त्रिदिसवीय मरगुल उस्तव के दूसरे दिन का आग़ाज़ महिला रस्साकशी, बुनाई प्रतियोगिता के साथ हुआ। इसके पश्चात ‘मरगुल उत्सव’ के दूसरे दिन आज राज्यस्तरीय नृत्य में एमएससी उदयपुर द्वारा शेणी नृत्य , किब्बर, किंन्नौर, के दलों द्वारा लोकनृत्य स्पिति का मंकी डांस, पांगी का नृत्य विशेष रहे।

जिलास्तरीय नृत्य में महिलमण्डल किशोरी, शकोली, तमलू, सिंदवाडी, मशादी, नामु, जसरथ, बीहड़ी, थपाक कीर्तिंग, आड़त, किशोरी, बरदंग, चिमरेट, बलगोट के लोकनृत्य भी मनमोहक रहे। इसके अतिरिक्त हिमाचल होम गार्ड बैंड तथा पारंपरिक वस्त्राभूषण प्रतियोगिता कार्यक्रम करवाए गए। इस अवसर पर हमने लाजवाब लाहौल, मीडिया कैम्पेन का भी शुभारंभ किया।

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