टिकट आबंटन में मूल्यांकन हार जीत नहीं बल्कि साफ़ छवि के आधार पर होता है निधारित

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डोल भटहेड़ – अमित शर्मा

पूर्व पंचायत समिति सदस्य एवं वर्तमान उपप्रधान पंचायत डोल भटहेड़ साधू राम राणा ने चुनावों में टिकटों के आबंटन को लेकर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि राजनीति दलों द्वारा चुनावों में प्रत्याशियों के चयन में इस आधार पर मापदंड हमेशा तह नहीं किया जाता है कि चुनाव में टिकट सिर्फ जीते हुए प्रत्याशी को ही दुबारा मिले और चुनाव में हारे हुए को प्रत्याशी न बनाया जाए।

राजनीति में ऐसे अनेकों उदाहरण हैं जब सीटिंग विधायकों एवं सांसदों का टिकट काट कर किसी नए चेहरे को चुनाव में टिकट थमा दी गई और कई बार लगातार हारने वाले को बार बार टिकट थमाकर प्रत्याशी बनाया जाता रहा है।

उदाहरण के तौर ज्वाली विधानसभा से कोटला बैल्ट से डाक्टर हरबंस राणा को लगातार तीन बार हारने पर भी बिना किसी भागदौड़ के भाजपा द्बारा टिकट साफ़ छवि के आधार पर दी जाती रही लेकिन वहीं अर्जुन ठाकुर को इतनी बड़ी जीत के उपरांत भी दुसरी बार भाजपा कैडर ने टिकट केलिए आयोग्य मानते हुए प्रत्याशी नहीं बनाया था।

अतः भले ही अन्य दलों में न सही लेकिन भाजपा में जीते हुए प्रत्याशियों को यह भ्रम दिमाग में नहीं पालना चाहिए कि एक बार चुनाव जीतने पर दुसरी बार टिकट मिलना तह मान ली जाए और हारने वाले को भी दुबारा टिकट ना मिलने की उम्मीद नहीं खोनी चाहिए कि चुनाव हारने पर दुबारा टिकट नहीं मिलेगी।

अतः राजनीति में आगे बढ़ने केलिए साफ़ छवि का भी बहुत बड़ा योगदान रहता है जो सिर्फ चुनिंदा राजनेताओं में ही देखने को मिलती है जबकि अधिकतर राजनेता राजनीति में जातिवाद और परिवारवाद के सहारे ही टिके हुए हैं।

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