हिमखबर – डेस्क
दो माह के मत्स्य आखेट प्रतिबंध का समय खत्म होते ही अब मछुआरों के चेहरों पर रौनक लौट आई है। इसके साथ ही किश्तियों के चलने से 15 अगस्त शाम को झील में रौनक लौट आएगी तथा झील गुलजार हो जाएगी।
इस बार अभी तक झील में कतला, ग्रासकार्प प्रजाति मछली का 11 लाख बीज डाला गया और अभी सात लाख मछली का बीज डाला जाएगा, ताकि उत्पादन अच्छा हो सके।
पौंग झील में भी 16 जून से लेकर 15 अगस्त तक मत्स्य आखेट पर प्रतिबंध लगा हुआ था, लेकिन अब 15 अगस्त को मछुआरे झील में जाल बिछा देंगे। पौंग झील में करीब 3200 मछुआरे हैं, जो कि मछली पकडऩे का कार्य करते हैं।
गुरुवार को मछुआरे अपनी किश्तियों सहित जाल इत्यादि सामग्री को ट्रैक्टरों के माध्यम से झील किनारे पहुंचाने में जुट गए तथा 15 अगस्त को शाम के समय मछुआरे झील में जाल लगा देंगे। शुक्रवार 16 अगस्त को मत्स्य एकत्रीकरण केंद्रों में मछली पहुंच जाएगी।
पौंग झील की मछली पठानकोट सहित दिल्ली मछली मंडी में काफी डिमांड रहती है। 16 अगस्त से मंडियों में भी झील की मछली पहुंच जाएगी। इस बार मछली के अवैध शिकार पर 125 चालान काटकर एक लाख 23 हजार 850 रुपए जुर्माना वसूल किया गया है।
मत्स्य सहायक निदेशक पौंग बांध एसके वभौरिया के बोल
इस बारे मत्स्य सहायक निदेशक पौंग बांध एसके वभौरिया ने बताया कि 15 अगस्त शाम को झील में शिकारी जाल डाल देंगे। उन्होंने शिकारियों को हिदायत दी है कि समय अनुसार ही जाल बिछाएं तथा अंडर साइज जाल न लगाएं, अगर कोई पकड़ा गया तो उसका लाइसेंस रद्द किया जाएगा।