द्रोणाचार्य शिक्षा महाविद्यालय रैत में मनाई महाराणा प्रताप जंयती

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रैत – नितिश पठानियां

द्रोणाचार्य शिक्षा महाविद्यालय रैत में महाराणा प्रताप जंयती मनाई गई । इस अवसर पर महाविद्यालय कार्यकारी निदेशक डॉ बीएस पठानिया ने मुख्यातिथि के रूप में शिरकत की कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वालन कर और महाराणा प्रताप की प्रतिमा के समक्ष पुष्प अर्पित कर की गई ।

इस अवसर पर द्रोणाचार्य महाविद्यालय के 6 प्रशिक्षु छात्रों महाराणा प्रताप की जीवनी पर प्रकाश डाला । इस अवसर पर मुख्यातिथि डॉ बीएस पठानिया ने बताया कि महाराणा प्रताप का जन्म सोलहवीं शताब्दी में राजस्थान में हुआ था।

अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार उनका जन्म 9 मई, 1540 को कुंभलगढ़ में हुआ था। इस दिन ज्येष्ठ मास की तृतीया तिथि थी, महाराणा प्रताप ने कई बार अकबर से लड़ी लड़ाई।

उन्होंने कहा कि इतिहास में महाराणा प्रताप ने कई बार अकबर के साथ लड़ाई लड़ी। उन्हें महल छोड़कर जंगलों में भी रहना पड़ा। अपने पूरे जीवन में उन्होंने संघर्ष किया, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। उनका नाम इतिहास के पन्नों में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज है। आइए उनके जीवन से जुड़ी कुछ अहम बातों को जानते हैं।

वहीं प्राचार्य डॉ प्रवीण कुमार शर्मा ने बताया कि महाराणा प्रताप ने अपनी मां से अपनी युद्ध कौशल की शिक्षा ग्रहण की थी। उन्होंने हल्दीघाटी के युद्ध में अकबर को पूरी टक्कर दी थी। जबकि महाराणा प्रताप के पास केवल 20 हजार सैनिक थे और अकबर के पास करीबन 85 हजार सैनिकों की सेना थी।

इसके बावजूद इस युद्ध को अकबर जीत नहीं पाया था। उनकी हिम्मत को देश सलाम करता है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, महाराणा प्रताप के भाले का वजन 81 किलो और छाती के कवच का वजन 72 किलो था । उन्होंने सभी प्रतिभागियों को कार्यकम में हिस्सा लेने के लिए बधाई दी और कार्यक्रम आयोजक विवेकानद सदन को भी बधाई दी ।

इस मौके पर महाविद्यालय के प्रबंधक निर्देशक जी.एस पठानिया,कार्यकारिणी निर्देशक बी.एस पठानिया,प्राचार्य डॉ प्रवीण कुमार शर्मा,एचओडी सुमित शर्मा,सहित समस्त स्टाफ उपस्थित रहा।

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