
परागपुर- आशीष कुमार
हिमाचल प्रदेश कर्मचारी कल्याण बोर्ड के पूर्व उपाध्यक्ष ठाकुर सुरिन्द्र सिंह मनकोटिया ने प्रदेश सरकार द्वारा पेश किए गए बजट को आंकड़ों का मक्कड़जाल बताया है। बजट में एक बार फिर जनता को ठगने का काम सरकार ने किया है। ओपीएस और उनके अंदोलन पर बजट में कोई जिग्र नहीं है। प्रदेश में 14 लाख शिक्षित बेरोजगार मारे-मारे फिर रहे हैं। इनके भविष्य को लेकर सरकार ने कोई दिशा तय नहीं की है।
कर्मचारियों के प्रति सरकार तानाशाह रवैया अपनाकर असंवेदनशीलता का परिचय दिया है। हिमाचल प्रदेश कर्मचारियों के लिए इस बजट में कुछ नहीं कहा गया है। आऊटसोर्स और एसएमसी कर्मचारियों पर तो कोई बात न करना सरकार की हठधर्मिता को दर्शाता है। मनकोटिया ने पूछा कि कोविड-19 काल में जिन लोगों की नौकरियां छूट गई हैं और जो गुजर बसर के लिए प्रदेश में मारे-मारे फिर रहे हैं उनके बारे में कोई योजना बजट में नहीं है।
आज मुख्यमंत्री किसानों के हित की बात कर रहे है इनको शर्म आनी चाहिए। जब किसान सर्दी बरसात में एक साल से जयदा समय तक सड़को पर रहे तब यही सरकार काले कृषि बिलो के फायदे गिना रही थी।
कम से कम पांच हजार तो होनी चाहिए बिधबा /एकल/ वृद्धा पेंशन
सरकार बताए क्या हजार पन्द्रह सो में बेचारे अशहाय लोगो का गुजारा हो सकता है ? ये निर्णय भी गरीबो का मजाक उड़ाने वाला है। जब पटाखा फैक्टरी घटना के बारे में मनकोटिया से पूछा गया तो उन्होंने बताया इसके लिए सिर्फ उधोग मंत्री विक्रम ठाकुर जिमेदार उनको तो इस्तीफा दे देना चाहिए था ।। ऐसा कैसे सम्बभ है कि सरकार के बिना ध्यानार्थ अवैध फेक्ट्री चलती रही हो ?
आज 150 दिनों से करुणामुलक नौकरियां वाले हड़ताल पर बैठे हैं, और नौकरी की आस में बुढ़े होते जा रहे हैं लेकिन सरकार इसको लेकर भी असंवेदनशील बनी हुई है। मध्यम तबके के व्यापारी से लेकर हर आम तबके के लोगों को बजट में कोई आस नहीं दिखी है। प्रदेश कर्जे के पहाड़ के नीचे लगातार दबा जा रहा है।
कुल मिलाकर यह बजट एक रटारटाया दस्तावेज साबित हुआ है, जिससे प्रदेश के किसान, बागवान, कर्मचारी, व्यापारी को कुछ नहीं मिला है। यह बजट मंहगाई की रोकथाम करने में विफल साबित हुआ है।
