हिमाचल प्रदेश में निरक्षर लोगों की संख्या को लेकर आंकड़े सामने आए हैं, जानिए प्रदेश में साक्षरता और निरक्षरता की स्थिति क्या है।
शाहपुर – नितिश पठानियां
हिमाचल प्रदेश में लोगों को साक्षर बनाने को लेकर अहम भूमिका निभाने वाली उल्लास योजना की गति अब धीमी पड़ गई है। योजना को केंद्रीय बजट न मिलने से अब तक 25 से 28 हजार लोगों को साक्षर बनाने की योजना गति नहीं पकड़ पा रही है। बजट जारी न होने के कारण प्रदेश में जिला और ब्लॉक स्तर पर साक्षरता कक्षाएं शुरू नहीं हो पाई हैं।
प्रदेश में उल्लास योजना के तहत पिछले दो वर्षों में एक लाख लोगों को साक्षर बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। योजना में धनराशि की कमी से सितंबर में प्रस्तावित परीक्षा भी नहीं हुई है। ऐसे में साक्षर होने की राह देख रहे करीब निरक्षर लोगों को अभी और इंतजार करना पड़ सकता है।
विभाग के प्रयासों से बड़ी संख्या में लोगों को साक्षर किया जा चुका है, लेकिन अभी भी करीब 25 से 28 हजार लोग निरक्षर हैं। इन्हें साक्षर बनाने के लिए विभाग की ओर से आगे की प्रक्रिया पूरी की जानी है। हालांकि बजट के अभाव में योजना की गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं। हिमाचल प्रदेश में उल्लास योजना के तहत चलाए जा रहे साक्षरता अभियान के माध्यम से प्रदेश की साक्षरता दर बढक़र करीब 95 प्रतिशत हो गई है।
शेष निरक्षर लोगों को साक्षर बनाने के लक्ष्य को हासिल करने के लिए विभाग को अब केंद्र से मिलने वाले बजट का इंतजार है। योजना के तहत बचे हुए लोगों को साक्षर करने का काम पूरा होने से प्रदेश की साक्षरता दर में और सुधार होने की उम्मीद है। हालांकि सभी लोगों के साक्षर होने के बाद साक्षरता दर 100 प्रतिशत होने का लक्ष्य हासिल करने के लिए निर्धारित मानकों के अनुसार आकलन करना होगा।
फिलहाल, केंद्र से बजट नहीं मिलने के कारण योजना की गतिविधियां ठप हैं। ऐसे में प्रदेश के शेष निरक्षर लोगों को साक्षर बनाने का लक्ष्य पूरा करने के लिए केंद्र से बजट जारी होने का इंतजार किया जा रहा है।
बजट मिलने के बाद शुरू होंगी कक्षाएं
पूर्ण साक्षर बनने की ओर अग्रसर हिमाचल प्रदेश में केंद्र से बजट जारी होने के बाद जिला और ब्लॉक स्तर पर उल्लास योजना की कक्षाएं दोबारा शुरू की जाएंगी। इसके बाद निरक्षर लोगों को साक्षर बनाने के लिए अभियान में तेजी लाई जाएगी। विभाग से मिली जानकारी के तहत सितंबर में नहीं हो पाई परीक्षा अब मार्च में करवाने की तैयारी है। हालांकि, परीक्षा की तारीख और कक्षाएं शुरू करने को लेकर अंतिम निर्णय बजट जारी होने के बाद ही लिया जा सकेगा।

