नूरपुर – स्वर्ण राणा
हाल ही में लागू किए गए यूजीसी कानून के विरोध में स्वर्ण समाज नूरपुर द्वारा आज एक शांतिपूर्ण आंदोलन एवं रैली का आयोजन किया गया। रैली के उपरांत समाज की ओर से महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू को ज्ञापन भेजकर यूजीसी कानून को तत्काल प्रभाव से निरस्त करने की मांग की गई।
रैली में बड़ी संख्या में समाज के लोग, युवा एवं विद्यार्थी शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने हाथों में तख्तियां लेकर शिक्षा में समानता, भयमुक्त शैक्षणिक वातावरण और सामाजिक समरसता की मांग उठाई। रैली शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई तथा प्रशासन के माध्यम से ज्ञापन राष्ट्रपति तक भेजा गया।
स्वर्ण समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि यूजीसी कानून से शिक्षण संस्थानों में भय का माहौल बनेगा, जिससे प्रतिभाशाली विद्यार्थियों का मानसिक विकास बाधित होगा। समाज का आरोप है कि पहले से ही आरक्षण व्यवस्था की असमानताओं के कारण योग्य विद्यार्थियों को पर्याप्त अवसर नहीं मिल पा रहे हैं, और नया कानून इस असंतुलन को और बढ़ाएगा।
उन्होंने कहा कि भय के वातावरण में विद्यार्थी अपनी प्रतिभा को उजागर नहीं कर पाएंगे, जिससे देश को भविष्य के वैज्ञानिक, शिक्षाविद, साहित्यकार और शोधकर्ता नहीं मिल पाएंगे। इसके परिणामस्वरूप भारत में ब्रेन ड्रेन की समस्या और गंभीर हो सकती है।
रैली के दौरान यह भी चिंता जताई गई कि यूजीसी कानून के दुरुपयोग से शिक्षण संस्थानों में विभिन्न वर्गों के विद्यार्थियों के बीच आपसी सौहार्द बिगड़ सकता है, जिससे सामाजिक तनाव और अव्यवस्था बढ़ेगी।
स्वर्ण समाज ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन पूर्णतः लोकतांत्रिक, शांतिपूर्ण और संविधान के दायरे में है। समाज ने राष्ट्रपति से आग्रह किया है कि देशहित, सामाजिक एकता और विद्यार्थियों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए इस कानून को निरस्त किया जाए। ज्ञापन की प्रतिलिपि माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा माननीय केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को भी भेजी गई है।

