हिमखबर डेस्क
हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस नेता और सार्वजनिक विकास मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) बंद करने के फैसले को प्रदेश के लिए एक गंभीर आर्थिक संकट की शुरुआत बताया है और लोगों से राज्य सरकार के साथ मिलकर इस चुनौती का सामना करने का आग्रह किया।
विक्रमादित्य सिंह ने सोमवार को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कड़े शब्दों में कहा कि आरडीजी बंद होने से आने वाले वर्षों में विकास कार्यों, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और बुनियादी सुविधाओं पर दूरगामी प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यह मुद्दा दलीय राजनीति से परे है और हर हिमाचली के भविष्य को सीधे तौर पर प्रभावित करता है, जिसमें कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की सुरक्षा, किसानों और मजदूरों की आजीविका, युवाओं के लिए रोजगार के अवसर और बच्चों की शिक्षा शामिल है।
विक्रमादित्य सिंह ने स्थिति को वित्तीय आपातकाल बताते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश, एक पहाड़ी और आपदा-प्रवण राज्य होने के नाते, संवैधानिक रूप से केंद्र से विशेष वित्तीय सुरक्षा का हकदार है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार तथ्यों के आधार पर लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीकों से अपने उचित हिस्से की मांग करती रहेगी और इस बात पर जोर दिया कि यह समर्थन एक अधिकार है कोई एहसान नहीं है।
उन्होंने कहा कि सरकार जलविद्युत क्षमता का पूर्ण उपयोग करके, पर्यटन और बागवानी को बढ़ावा देकर, सेवा क्षेत्र के विस्तार और राजस्व के नए स्रोत तलाश कर राज्य के संसाधनों को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि फिजूलखर्ची पर कड़ी लगाम लगाई जाएगी ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि प्रत्येक रुपया जनहित में खर्च हो। कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को आश्वस्त करते हुए उन्होंने कहा कि वेतन, पेंशन, सम्मान या भविष्य की सुरक्षा पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
उन्होंने लोगों से अफवाहों और निराशा से बचने, जागरूक रहने और जिम्मेदारी से अपनी आवाज उठाने की अपील की। सिंह ने कहा कि हिमाचल प्रदेश ने हमेशा मुश्किल समय में दृढ़ता दिखाई है। एकता, दृढ़ संकल्प और जनसमर्थन से हम इस संकट से उबरेंगे और राज्य को आर्थिक रूप से मजबूत और आत्मनिर्भर बनाएंगे। उन्होंने नागरिकों से इस चुनौतीपूर्ण दौर में सरकार के साथ मजबूती से खड़े रहने की अपील की।

