चम्बा – भूषण गुरुंग
हिमाचल प्रदेश के चम्बा ज़िला में डलहौजी और चम्बा विधानसभा क्षेत्र की कई पंचायतों को जोड़ने वाला सीयूल नदी पर बना पैदल कांडी पुल इन दिनों बदहाली के दौर से गुजर रहा है। करीब 35 वर्ष पहले बना यह पुल अब जर्जर हालत में पहुंच चुका है और कभी भी किसी बड़े हादसे का कारण बन सकता है।
इस पुल से रोज़ाना हज़ारों लोग पैदल आवाजाही करते हैं। चमेरा बांध बनने से पहले यह पुल भारत के सबसे ऊँचे पुलों में गिना जाता था हालांकि बांध में पानी भरने से इसकी ऊँचाई कुछ कम जरूर हुई है, लेकिन इसके बावजूद आज भी यह पुल डलहौजी और भलेई माता मंदिर आने वाले सैलानियों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
आस-पास की कई पंचायतों के लोग आपसी रिश्तेदारी के चलते रोज़ इसी पुल से गुजरते हैं। इसके साथ ही स्कूल जाने वाले बच्चे भी इसी पुल से रोज़ाना पैदल आवाजाही करते हैं, जिससे उनकी सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। पुल की ऊँचाई अधिक होने के कारण यह स्थान अब ‘सुसाइड पॉइंट’ के नाम से भी जाना जाने लगा है।
पुल के दोनों ओर लगी लोहे की सुरक्षा दीवारें काफी नीची हैं, जिससे यहां से कूदना आसान हो जाता है। अब तक 5 से 7 लोग इसी पुल से कूदकर अपनी जान गंवा चुके हैं। हाल ही में एक युवक ने भी यहां से छलांग लगाई थी, जिसका शव करीब दो महीने बाद बरामद हुआ।
पुल का फर्श जगह-जगह से उखड़ रहा है, वहीं दोनों तरफ लगी लोहे की सुरक्षा दीवारें भी धीरे-धीरे कमजोर होती जा रही हैं। ऐसे में यहां किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह पुल दोनों ओर के गांवों को जोड़ने का एकमात्र साधन है। रोज़ाना ग्रामीणों के साथ-साथ स्कूली बच्चे भी इसी पुल से होकर आते-जाते हैं।
पुल का फर्श टूट चुका है और किनारों पर लगा लोहे का ढांचा भी खराब हो रहा है, जिससे खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। यह पुल बहुत पुराना हो चुका है। यहां पर्यटक भी आकर फोटो खींचते हैं, लेकिन सुरक्षा के पुख्ता इंतज़ाम नहीं हैं। पुल के दोनों तरफ ऊंचा लोहे का जाल लगाना बहुत जरूरी है, ताकि आत्महत्याओं पर भी रोक लग सके। सरकार और संबंधित विभाग को चाहिए कि समय रहते इसकी मरम्मत कर इसे सुरक्षित बनाया जाए, ताकि कोई बड़ा हादसा न हो।

