चम्बा – भूषण गुरुंग
‘हौसलों के तरकश में कोशिश का वो तीर जिंदा रख, हार जाए चाहे जिंदगी में सबकुछ, मगर फिर से जीतने की उम्मीद जिंदा रख’। इन पंक्तियों को चम्बा जिले के उपमंडल चुराह की 2 सगी बहनों ने अपनी कड़ी मेहनत और पिता के अटूट विश्वास से सच कर दिखाया है।
चुराह की ग्राम पंचायत सत्यास के ध्यास गांव की कोमल भारती और सेजल भारती ने अपने पहले ही प्रयास में यूजीसी-नैट जेआरएफ क्वालीफाई कर पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया है। एक सामान्य परिवार से ताल्लुक रखने वाली इन दोनों बेटियों का सफर कांटों भरा था। पिता मनसा राम ने घर की आर्थिक तंगी को बच्चों की पढ़ाई के आड़े नहीं आने दिया।
बेटियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए उन्होंने न केवल दिहाड़ी-मजदूरी की, बल्कि बैंक से कर्ज लेकर उनकी पढ़ाई का खर्च उठाया। अपनी जीवनभर की जमा-पूंजी उन्होंने बच्चों की शिक्षा पर लगा दी। कोमल और सेजल की प्रारंभिक और उच्चतर शिक्षा स्थानीय स्कूल बैरागढ़ से हुई, जिसके बाद उन्हें बेहतर कोचिंग के लिए धर्मशाला भेजा गया।
चुराह के इतिहास में यह पहला अवसर है जब एक ही परिवार की दो सगी बहनों ने एकसाथ इतनी कठिन परीक्षा पहले ही प्रयास में उत्तीर्ण की हो। यह उपलब्धि न केवल इन बेटियों की मेहनत, बल्कि उनके पिता की प्रगतिशील और दूरदर्शी सोच का भी परिणाम है।
समाज में बेटियां बेटों से कम नहीं होतीं… इस संदेश को इस परिवार ने धरातल पर चरितार्थ किया है। खुशी की बात यह भी है कि कोमल और सेजल का भाई भी वर्तमान में यूपीएससी की तैयारी कर रहा है। गरीबी और संसाधनों की कमी के बावजूद कोमल और सेजल की सफलता ने साबित कर दिया है कि अगर इरादे फौलादी हों तो प्रतिभा को कोई नहीं रोक सकता।
पिता मनसा राम के लिए यह पल गर्व से भरा है, क्योंकि जिस मेहनत और पसीने से उन्होंने शिक्षा की नींव रखी थी, आज बेटियों ने उस पर सफलता का आसमान छू लिया है। यह कामयाबी आज चुराह की हर उस बेटी के लिए प्रेरणा बन गई है जो सीमित संसाधनों के बीच ऊंचे सपने देखती है।

