हिमाचल में वर्षा, भूस्खलन व बाढ़ ने ली 51 की जान, शिमला में शिव मंदिर पर गिरा मलबा, आठ की मौत, 30 लापता, सोलन के ममलीग में घरों पर गिरा मलबा, सात की गई जान, मंडी के चलाहर गांव में भूस्खलन से परिवार के सात सदस्यों की मौत, कांगड़ा व हमीरपुर जिला में तीन-तीन लोगों की गई जान
शिमला – नितिश पठानियां
हिमाचल में जानलेवा भारी बारिश से खूब तबाही हुई है। शिमला, मंडी और सोलन सहित समूचे हिमाचल में जल प्रलय से जहां 50 लोगों की मौत हो गई है, वहीं कई घायल हैं।
मंडी, शिमला और सोलन में सबसे ज्यादा जानें गई हैं। जगह-जगह भूस्खलन से पांच नेशनल हाईवे सहित 800 से ज्यादा सडक़ें बंद हैं। साथ ही 3000 से ज्यादा ट्रांसफार्मर ठप हो गए हैं।
इसी बीच सरकार ने फैसला लिया है कि स्वतंत्रता दिवस यानी 15 अगस्त को सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित नहीं किए जाएंगे।
मंडी और शिमला में हुए हादसों के बाद मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू खुद स्पॉट पर पहुंचे और राहत एवं बचाव कार्यों का जायजा लिया। मुख्यमंत्री लगभग डेढ़ घंटे तक घटनास्थल पर रुके तथा राहत एवं बचाव कार्यों की निगरानी की।
उन्होंने अधिकारियों को बचाव कार्यों में और तेज़ी लाने के लिए कहा। राहत एवं बचाव कार्यों में सेना के साथ-साथ एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, आईटीबीपी, पुलिस एवं होम गार्ड के जवान और स्थानीय लोग शामिल हैं।
भारी बारिश से एचआरटीसी के 1800 बस रूट बंद हैं, जबकि नेशनल हाईवे ठप होने से इंटर स्टेट रूट भी प्रभावित हुए हैं। ऑरेंज अलर्ट को देखते हुए किन्नर कैलाश यात्रा को दूसरी बार स्थगित करना पड़ा है।

प्रदेश में प्राकृतिक आपदा के चलते नदी-नाले उफान पर हैं। ऐसे में पुलिस मुख्यालय और ट्रेफिक टूरिस्ट एवं रेलवे पुलिस ने एडवाइजरी जारी कर लोगों को नदी-नालों के किनारे न जाने की सलाह दी है। नदी के किनारे भवनों को खाली कराया जा रहा है।
पुलिस की ओर से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों और नदियों के आसपास पेट्रोलिंग की जा रही है। जिन सडक़ों में लगातार भूस्खलन हो रहा है, वहां लोगों को सफर करने के लिए मना किया जा रहा है।

