कांगड़ा सिविल हॉस्पिटल की हालत खराब ;ओपीडी में मरीजों के लिए लगाई गई नंबर टोकन मशीनें भी बंद
काँगड़ा – राजीव जस्वाल
सिविल अस्पताल कांगड़ा की हालत दयनीय हो गई है। अस्पताल की बाहरी दीवारों पर बहुत समय से कोई रंग-रोगन नहीं किया गया है। ऊपर से बाहरी दीवारों पर घास उग गई है जिसे अभी तक साफ नहीं करवाया गया है।
अस्पताल के अंदर बिजली के बोर्ड व तारें खुली पड़ी हैं जिसके कारण किसी मरीज या अन्य किसी के छूने से कोई भी बड़ा हादसा हो सकता है। बिजली की फिटिंग भी बहुत पुरानी हो चुकी है जिसे अभी तक बदला नहीं जा सका है। बिजली की पुरानी तारों के साथ बल्बों के होल्डर भी बिना बल्बों के लटके हुए हैं।
दरवाजों की हालत भी खस्ता हो चुकी है। छतों की सीलिंग बुरी तरह से टूटी हुई है। खिड़कियों के शीशे टूटे हुए हैं और कहीं तो खिड़कियां ही नहीं हैं। वाटर कूलर सूखे होने के कारण धूल फांक रहे हैं। दीवारों की सिलिंग भी उखड़ चुकी है जिसे रिपेयर भी नहीं किया गया है।
शौचालयों की हालत भी बुरी बनी हुई है और कई जगहों पर शौचालयों पर दरवाजे ही टूटे हुए हैं। अस्पताल के बाहर की दीवारों पर घास उगी हुई है और अस्पताल की नेम प्लेट्स भी धुंधली और फट चुकी हैं जिन्हें अभी तक भी बदला नहीं जा सका है।
अंदर ओपीडी में मरीजों के लिए लगाई गई नंबर टोकन मशीनें भी बंद पड़ी हैं। हैरानी की बात है कि क्या सिविल अस्पताल कांगड़ा की रिपेयरिंग के लिए कोइ फंड नहीं मिला है।

अस्पताल स्टाफ, कर्मचारियों के कारनामे
जब एसएमओ इंचार्ज डा. विवेक कुमार करोल से संपर्क करना चाहा तो स्टाफ के कर्मचारियों ने उनका मोबाइल नंबर देने से मना कर दिया और कहा की एसडीएम के अलावा किसी को भी नंबर देने से मना किया गया है। चाहे मिडिया से कोई हो या पुलिस से डीएसपी हो। किसी कर्मचारी ने कहा की एसएमओ मीटिंग में हैं, किसी ने कहा की तबीयत खराब है, तो किसी ने कहा की अभी गए हैं।
बहरहाल अस्पताल की किसी भी सूचनापट्ट पर एसएमओ का नंबर मेंशन या लिखा हुआ नहीं है। जब मीडिया को ही एसएमओ से संपर्क नहीं करने दिया गया तो आम आदमी के क्या हाल होते होंगें।

