राजोल पंचायत में बीपीएल चयन को लेकर की धांधली, विधवा व अपंग लोगों को दिखाया बाहर का रास्ता, 19-20 सालों से एक गरीब परिवार तिरपाल के नीचे कर रहा अपनी जिंदगी का गुजर बसर।
ज्वाली – अनिल छांगु
भले ही आजादी के 76 वर्ष बीत गए लेकिन धरातल पर आज भी जिला कांगड़ा के लोकप्रिय कृषि मंत्री एवम पशु पालन विभाग के मंत्री चंद्र कुमार की अपनी विधान सभा क्षेत्र ज्वाली की पंचायत राजोल के बाशिंदे आज भी काले पानी की सजा भुगत रहे है ।
बता दे कि पंचायत राजोल के गांव ओडरी निवासी राजिंदर कुमार 19-20 सालों से एक तिरपाल के नीचे अपने परिवार सहितअपनी जिंदगी बिता रहा है और बड़े हैरत की बात है कि आज दिन तक इस गांव में पैदल रास्ता भी नही बन पाया है ।
केवल एक पैरी ऊबड़ खाबड़ रास्ता होने कारण अगर कोई बीमार हो जाता है तो उसे पीठ पर उठाकर दो तीन किलोमीटर सड़क तक पहुंचाना पड़ता है ।
इतने सालों में कई पंचायतें व सरकारें आई और चली गई लेकिन इस गरीब का व गांव वालों का केवल वोट ही प्राप्त किया । किसी ने भी इनकी दुर्दशा की ओर कोई ध्यान नहीं दिया ।
इतना ही नहीं रजोल पंचायत के गांव अनुही निवासी सरदार सिंह पुत्र धर्म सिंह ने रजोल पंचायत पर आरोप लगाया है कि अप्रैल 2023 में जो आम इजलास हुआ ।
उसे पूरा करने के लिए फर्जी हस्ताक्षर किए और उस इजलास के जरिए पंचायत के प्रतिनिधियों ने गरीब जनता, विधवा महिलाओं और अपंग लोगों के पेट में छुरा घोंस कर पंचायत के वर्तमान पंचायत प्रतिनिधि व पूर्व प्रधान , पूर्व उपप्रधान सहित अपने सक्षम चहेतों को आईआरडीपी की सूची में दर्ज किया ।
पंचायत के प्रतिनिधियों ने फर्जी तरीके से अपनी गरिमा का दुरुपयोग करके पक्के मकान व मोटर कार वालों को बीपीएल की सूची में दर्ज करके विधवा और अपंग लोगों को बीपीएल की सूची से बाहर पछाड़ा । जिससे रजोल की जनता में भारी रोष पनप रहा है ।
शिकायतकर्ता सरदार सिंह सहित अनुही गांव की जनता ने मुख्यमंत्री सुविंदर सिंह सुक्खू, ग्रामीण विकास एवम पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह से मांग की है कि रजोल पंचायत के प्रतिनिधियों की गरीब जनता के साथ धोखाधड़ी करने बारे निष्पक्ष जांच करवाई जाए और दोषी पाए जाने की सूरत में दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त सजा दिलाई जाए ताकि भविष्य में कोई भी ऐसी कोताही न बरते ।
प्रधान ग्राम पंचायत रजोल पुष्पा देवी के बोल
प्रधान पुष्पा देवी ने बताया कि ओडरी निवासी राजिंदर कुमार के नाम पहले कोई भी जमीन नहीं थी और अब शायद किसी ने कुछ जमीन राजिंदर कुमार को दे रखी है ।
अभी हम उसे मकान देने की कोशिश कर रहे है और जो आरोप बीपीएल संबंधी हमारे ऊपर लगाए है तो इस बारे सर्वे करने वाली टीम ही जिम्मेवार है।
इजलास में प्रधान का कोई रोल नहीं होता है । जो भी कुछ गलत हुआ वो सर्वे टीम व जनता ही जाने क्योंकि आम इजलास में जनता सर्वोपरि होती है।
हां एक अपंग परिवार बीपीएल सूची से बाहर हुआ है। उसका मैं नाम नही जानती थी तो उसे मैंने बताया कि छः महीने के बाद मैं आपका नाम बीपीएल में डाल दूंगी।
बाकी कोरम पूरा करने के लिए हस्ताक्षरों की बात है तो पंचायत का सचिव, वार्ड मेंबर ही रजिस्टर पर लोगों के नाम लिखते है। मुझे इस बारे कोई जानकारी नहीं है।

