हिमाचल: खाद की कालाबाजारी, किसानों को 500 रुपये में बेचा जा रहा 266 रुपये का बैग

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किसानों को पड़ोसी राज्य उत्तराखंड से ब्लैक में खाद खरीदने को मजबूर होना पड़ रहा है। इन दिनों गन्ना और अन्य फसलों को खाद की जरूरत है।

सिरमौर – नरेश कुमार राधे

हिमाचल प्रदेश में खाद संकट के बीच इसकी कालाबाजारी शुरू हो गई है। डेढ़ माह से खाद के गोदामों और खरीद केंद्रों में आपूर्ति नहीं हो पाई है। इस बीच कुछ लोग उत्तराखंड से खाद लाकर इसके किसानों से मनमाने दाम वसूल रहे हैं।

किसानों को इस समय धान, मक्का, गन्ना और टमाटर आदि फसलों के लिए खाद की बेहद जरूरत है, लेकिन लंबे किसानों को खाद नहीं मिल रही है। इस संकट के बीच कुछ लोग उत्तराखंड से 266.50 रुपये में बैग खरीद कर किसानों को ब्लैक में 500 तक बेच रहे हैं।

उधर, खाद की कमी को लेकर भारतीय किसान यूनियन पांवटा  इकाई ने भी एसडीएम पांवटा को भी ज्ञापन सौंपकर समस्या को उठाया है। भारतीय किसान यूनियन पांवटा इकाई अध्यक्ष जसविंदर सिंह बिलिंग, राज्य महासचिव गुरजीत सिंह, राज्य उपाध्यक्ष चरनजीत सिंह, स्थानीय किसानों हरभजन सिंह, दीप चंद, कल्याण सिंह, रमेश शर्मा ने कहा कि सिरमौर में यूरिया खाद की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। इससे जिले के हजारों धान, गन्ना व मक्की उत्पादक परेशान हैं।

कई किसानों को पड़ोसी राज्य उत्तराखंड से ब्लैक में खाद खरीदने को मजबूर होना पड़ रहा है। किसानों ने बताया कि पांवटा और शिलाई क्षेत्र और आसपास ही मक्की 4,800 हेक्टेयर और धान 4,400 हेक्टेयर भूमि पर लगाई गई है। इन दिनों इन दोनों फसलों के साथ साथ गन्ना और अन्य फसलों को खाद की जरूरत है।

गिरिपार में भी इन दिनों मक्की, टमाटर, गोभी, भिंडी, मूली और अन्य सब्जियों की रोपाई से पहले खाद की आवश्यकता रहती है, लेकिन खाद सोसायटियों-डिपुओं में आपूर्ति नहीं पहुंचने से कुछ किसान मजबूरन दोगुने दामों पर ब्लैक में खाद बेचने वालों से खरीद रहे हैं।

एसडीएम पांवटा साहिब के बोल

एसडीएम पांवटा साहिब गुंजीत सिंह चीमा ने बताया कि किसानों को शीघ्र खाद की आपूर्ति व्यवस्था होगी और अन्य समस्याओं को भी दूर किया जाएगा।

एक सप्ताह के भीतर होगी आपूर्ति : हरजीत 

इफको के सोलन-सिरमौर जिला क्षेत्रीय अधिकारी हरजीत सिंह ने कहा कि दोनों जिलों में कुल 800 मीट्रिक टन में से सिरमौर से 400 मीट्रिक टन की मांग है। यूपी से खाद की आपूर्ति होती है। रेलवे लाइन प्रभावित होने से खाद नहीं पहुंच पाई है। एक सप्ताह के भीतर ही खाद आपूर्ति मांग पूरी होने की उम्मीद है।

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