न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायाधीश रंजन शर्मा की खंडपीठ ने नेपाली मूल के विक्की राणा और अन्य की अपील को स्वीकार किया है। अदालत ने उन्हें तुरंत रिहा करने के आदेश दिए हैं।
शिमला – नितिश पठानियां
हिमाचल हाईकोर्ट ने हत्या के जुर्म में आजीवन कारावास की सजा भुगत रहे दो आरोपियों को बरी किया है। न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायाधीश रंजन शर्मा की खंडपीठ ने नेपाली मूल के विक्की राणा और अन्य की अपील को स्वीकार किया है। अदालत ने उन्हें तुरंत रिहा करने के आदेश दिए हैं।
जानकारी के अनुसार पुलिस ने नेपाली मूल के दो युवकों पर ड्राइवर की हत्या कर ट्रक चुराने के आरोप में मामला दर्ज किया था। 7 नवंबर, 2013 को रोहड़ू पुलिस थाने से रामपुर पुलिस को सूचना दी गई कि मनोज और शीतल ने शिकायत की है कि मनोज के साले सुरेश चौहान के ट्रक को महेंद्र सिंह चला रहा था। वह मनीमाजरा गया था और उसके बाद उसने कालाअंब से सरिया लाद कर लाना था।
अभी तक वह रोहड़ू नहीं पहुंचा है। रोहड़ू पुलिस ने रामपुर पुलिस से आग्रह किया कि वह अपने क्षेत्राधिकार में ट्रक की खोज करे। रामपुर पुलिस ने नाका लगाया ही था कि पुलिस ने चोरी हुए ट्रक को रामपुर की तरफ से आते हुए देखा। पुलिस ने पाया कि ट्रक को नेपाली युवक चला रहा था और चार नेपाली ट्रक में बैठे थे।
पुलिस ने जांच में पाया कि महेंद्र सिंह जब सरिया लाद कर आ रहा था तो उस समय चार नेपालियों ने उससे चिड़गांव तक जाने के लिए लिफ्ट मांगी। महेंद्र सिंह ने भी उन्हें ट्रक में लिफ्ट दे दी। रास्ते में आरोपियों ने महेंद्र सिंह को जान से मार दिया। मामले की जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने सत्र न्यायाधीश की अदालत में चालान पेश किया।

विचारण अदालत ने मामले से जुड़े रिकॉर्ड और गवाहों के बयान के आधार पर विक्की राणा और एक अन्य को हत्या के लिए दोषी ठहराया था। विचारण अदालत ने उसे उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
इस निर्णय को अपीलार्थी ने अपील के माध्यम से हाईकोर्ट के समक्ष चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने सत्र न्यायाधीश के फैसले को पलटते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ अभियोग साबित करने में नाकाम रहा है।

