सुक्खू सरकार नहीं दे पाई 100 करोड़ तो सरकारी अस्पताल में क्रसना लैब के कर्मचारी गए हड़ताल पर , मरीजों की दिक्कत बढ़ीं

--Advertisement--

हिमखबर डेस्क

हिमाचल प्रदेश में आर्थिक संकट के बीच सरकारी अस्पतालों में क्रसना लैब के कर्मचारी हड़ताल पर चले गए हैं। इन्हें सैलरी नहीं मिल रही है। ऐसे में सरकारी अस्पतालों में मरीजों के टेस्ट ठप हो गए हैं। अहम बात है कि शिमला के आईजीएमसी और केएनएच अस्पताल में भी यही हाल है और यहां पर करोड़ों की देनदारी सरकार ने दे पाई है और ऐसे में कर्मचारियों को सैलरी देने के लाले हैं।

दरअसल, मुख्यमंत्री निदान योजना के तहत प्रदेशभर में रोगियों को सस्ती और सुलभ जांच सुविधा उपलब्ध कराने का दावा किया जाता है, लेकिन इस योजना से जुड़े कर्मचारी आज खुद आर्थिक तंगी से जूझने को मजबूर हैं। जिला मुख्यालय ऊना के क्षेत्रीय अस्पताल में संचालित निजी क्षेत्र की क्रसना लेबोरेटरी के कर्मचारियों को बीते दो महीनों से वेतन नहीं मिला है, जिससे उनका जीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।

दूर-दराज क्षेत्रों से आकर कार्य कर रहे इन कर्मचारियों के सामने किराया, राशन और परिवार के भरण-पोषण जैसी बुनियादी समस्याएं खड़ी हो गई हैं। बार-बार प्रबंधन से गुहार लगाने के बावजूद जब कोई ठोस समाधान नहीं निकला, तो कर्मचारियों ने मजबूरन हड़ताल का रास्ता चुना। इस घटनाक्रम ने एक बार फिर सरकारी योजनाओं में निजी भागीदारी और कर्मचारियों के अधिकारों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

कर्मचारियों का कहना है कि दिसंबर और जनवरी माह का वेतन अभी तक नहीं मिला है। कई कर्मचारी दूर-दराज के दूधराज क्षेत्र सहित अन्य स्थानों से आकर यहां कार्यरत हैं, लेकिन वेतन न मिलने से उनके पास न तो घर का किराया चुकाने के लिए पैसे हैं और न ही परिवार के पालन-पोषण के साधन।

कर्मचारी नरेंद्र कुमार ने बताया कि वे लगातार इस मुद्दे को अपने प्रबंधन के समक्ष उठाते रहे हैं, लेकिन हर बार उन्हें सिर्फ आश्वासन ही दिया गया। सोमवार को वेतन मिलने की बात कही गई थी, लेकिन मंगलवार बीत जाने के बावजूद भुगतान नहीं हुआ।

इससे आक्रोशित कर्मचारियों ने मंगलवार को सुबह 9 बजे से दोपहर 12 बजे तक तीन घंटे के कार्य बहिष्कार का ऐलान किया। इस हड़ताल में मुख्यमंत्री निदान योजना के तहत संचालित लेबोरेटरी के सभी कर्मचारी शामिल रहे। कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही वेतन को लेकर स्थायी समाधान नहीं निकाला गया, तो संगठन की राज्य कार्यकारिणी के निर्देशानुसार आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

हड़ताल को लेकर पूर्व में कोई सूचना नहीं दी गई थी-प्रबंधन

उधर, मुख्य चिकित्सा अधिकारी ऊना डॉ. संजीव कुमार वर्मा ने कहा कि उन्हें इस हड़ताल को लेकर पूर्व में कोई सूचना नहीं दी गई थी। उन्हें अब जानकारी मिली है कि क्रसना लेबोरेटरी के कर्मचारियों ने तीन घंटे काम बंद रखा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस दौरान क्षेत्रीय अस्पताल ऊना की सरकारी लेबोरेटरी में सभी आवश्यक जांच सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, ताकि उपचार के लिए आने वाले रोगियों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो। अस्पताल प्रशासन पूरी स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

100 करोड़ रुपये की देनदारी

धर्मशाला स्थित क्रसना लैब के सेंटर मैनेजर पंकज सूद ने बताया कि प्रदेश में करीब 1500 से 1800 कर्मी क्रसना लैब में सेवाएं दे रहे हैं, जिन्हें तीन माह से वेतन न मिलने की वजह से खासी दिक्कतें पेश आ रही हैं। उन्होंने बताया कि सरकार पर क्रसना कंपनी का 100 करोड़ रुपये लंबित है, जिसका भुगतान न होने के चलते हड़ताल जैसा कदम उठाना पड़ा है।

उन्होंने बताया कि तीन माह से वेतन न मिलने के चलते लैब कर्मियों को मकान किराया, बच्चों की स्कूल फीस व परिवार चलाना मुश्किल हो गया है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया है कि कंपनी को लंबित भुगतान जल्द किया जाए, जिससे कि उन्हें वेतन मिल सके तथा वे अपनी सेवाएं निर्बाध रूप से दे सकें।

--Advertisement--
--Advertisement--

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

--Advertisement--

Popular

More like this
Related

शिवरात्रि: 300 साल बाद महाशिवरात्रि पर दुर्लभ संयोग, इन राशियों में बन रहे चार शक्तिशाली राजयोग

शाहपुर - नितिश पठानियां महाशिवरात्रि का त्योहार 15 फरवरी को मनाया...

गिरड माता मंदिर जलने से सदमे में लोग; खाना-पीना छोड़ा, सरकार से मदद की आस

चम्बा - भूषण गुरुंग हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले के...

हिमाचल के स्कूलों में 1 मार्च से बच्चों के लिए मोबाइल पर रोक, जारी होगी SOP

हिमखबर डेस्क हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में एक मार्च...