सुक्खू सरकार के अब तक लिए निर्णय ही व्यवस्था परिवर्तन – नरेश चौहान

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शिमला – नितिश पठानियां

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के प्रधान मीडिया सलाहकार नरेश चौहान का कहना है कि सत्ता आती-जाती रहेगी, एक बार व्यवस्था दुरुस्त हो जाए तो इससे बेहतर कुछ नहीं। अब तक के तीन सप्ताह के कार्यकाल में कांग्रेस सरकार ने कई बड़े निर्णय लिए हैं, यह व्यवस्था परिवर्तन की शुरुआत है।

स्वास्थ्य और शिक्षा मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार की प्राथमिकता में हैं। 10 गारंटी पूरे करने को कांग्रेस वचनबद्ध है। दैनिक जागरण प्रेस परिसर पहुंचे नरेश चौहान ने सरकार के विजन और अब तक लिए गए निर्णयों पर खुलकर बातचीत की।

सीएम सुक्खू के मीडिया सलाहकार से पूछे गए सवाल 

1- आपकी सरकार भाजपा सरकार के खोले गए कार्यालय बंद कर रही है, ऐसा क्यों? 

जवाब – (थोड़ा सोचकर) भाजपा ने तीन हजार करोड़ रुपये के कार्यालय बिना बजट के खोले थे, वे बंद किए जा रहे हैं। सब पक्के तौर पर बंद नहीं किए हैं, सरकार देखेगी, जहां जरूरी होगा, कार्यालय अवश्य खोला जाएगा। बात केवल इतनी है कि सुक्खू सरकार का जोर गुणवत्ता पर रहेगा।

जो कार्यालय डीनोटिफाई किए हैं, उन्हें फिर से नोटिफाई भी कर सकते हैं लेकिन पहले बजट का प्रबंध करेंगे। जो अधिकारी भाजपा के समय में बजट न होने की बात करते थे, वही अब कह रहे हैं कि ऐसा किया जा सकता है। बजट प्रबंधन करना सरकार का काम है, वही हम करेंगे।

कैसे करना है, यह भी सामने आएगा। सच यह है कि धन की कमी नहीं है, उसे कहां से लेकर कहां लगाना है, यही प्रबंधन हमारे संसाधनों की कुंजी है।

2- हिमाचल प्रदेश कर्मचारी चयन आयोग का कामकाज निलंबित करने पर क्या कहेंगे?

जवाब- केवल कामकाज निलंबित किया गया है। मुख्यमंत्री का यह मानना है कि स्वच्छता अभियान का लाभ तब ही है जब पारदर्शिता स्थायी रहे। सरकार इस बात का पूरा ध्यान रखेगी कि योग्य एवं पात्र लोगों के साथ अन्याय न हो। यह साहसिक निर्णय आयोग ही नहीं, प्रदेश और प्रदेश की जनता के हित में है जिसका आम आदमी ने भी स्वागत किया है।

3- तो क्या सरकार से उम्मीद करें कि कांग्रेस पूरी तैयारी के साथ निर्णय लेगी?

जवाब – जी बिल्कुल, जो भी कार्यालय खोले जाएंगे, उनके लिए पहले बजट की व्यवस्था होगी। स्टाफ उपलब्ध करवाया जाएगा। आधारभूत ढांचे के लिए जरूरी चीजों की व्यवस्था की जाएगी। तभी आगे बढ़ा जाएगा।

4-  क्या उम्मीद कर सकते हैं कि संस्थानों की दूरी और अन्य सभी चीजों को देखते हुए नीति बनाएंगे?

जवाब -(प्रसन्नता जाहिर करते हुए) आपका सुझाव अच्छा है। दो बच्चों के लिए स्कूल खोलने से तो अच्छा है कि उन बच्चों को चार किलोमीटर दूर जाना पड़े या उनको कहीं छात्रावास में पढ़ने की अच्छी व्यवस्था हो जाए। एक स्कूल खोलने पर वहां स्टाफ पर जितना खर्च होता है, उससे कम खर्च में हम उन बच्चों के लिए पहले से चल रहे स्कूलों में गुणवत्ता वाली शिक्षा दें।

5- सरकार 100 रुपये किलो दूध खरीदने की बात कर रही है, आम लोग इतना महंगा दूध कैसे खरीद पाएंगे?

जवाब -कांग्रेस सरकार का मकसद आम आदमी तक लाभ पहुंचाना है। इसका बोझ आम आदमी पर नहीं पड़ने देंगे। इसके लिए पशुपालकों की सहायता की जाएगी। गाय और भैंस के दूध के हिसाब से सब्सिडी तय होगी। इससे जो बोझ पड़ेगा, उसे सरकार वहन करेगी। जो बोल दिया है, उसे पूरा करेंगे।

सीआर से सीएम की कुर्सी तक सुक्खू

आम परिवार से निकलकर मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचे हैं। सीआर (कक्षा प्रतिनिधि) से सीएम (मुख्यमंत्री) तक का सफर तय किया। वीरभद्र सिंह जैसे दिग्गज नेताओं के समय में खुद को स्थापित किया।

एनएसयूआइ से छात्र राजनीति की शुरुआत की। फिर युवा कांग्रेस में रहे। बाद में कांग्रेस का लंबे समय तक अध्यक्ष पद संभाला। मुख्यमंत्री सादगी पसंद व्यक्ति हैं। आल्टो कार में चलते हैं। खुद भी चलाने लग पड़ते हैं।

गांवों के लोगों को लाभ देने की नीति बोले

मुख्यमंत्री इस सोच के साथ काम कर रहे हैं कि प्रदेश में लगभग पौने पांच लाख लोग दूध का कारोबार करते हैं। ये लोग गांवों से पलायन न करें, इसके लिए जरूरी है कि उनकी आर्थिक स्थिति सुधरे। गांव में महिला गाय पालेगी तो दूध बेचकर महीने में लगभग 15 हजार रुपये कमा लेगी।

इससे उसके बच्चे पढ़ेंगे। परिवार पलेगा। इस कार्य पर सरकार थोड़ी सब्सिडी दे देगी तो कोई फर्क नहीं पड़ेगा। बड़ी बात यह कि इससे बेसहारा पशुओं की समस्या भी हल होगी।

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