सीबीएसई ने बदला नौवीं-दसवीं का सिलेबस, गणित-विज्ञान में होंगे दो लेवल, पास होने को 33 फीसदी अंक जरूरी

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तीन भाषाएं पढऩा अनिवार्य; गणित-विज्ञान में होंगे दो लेवल, पास होने को 33 फीसदी अंक लाना जरूरी

हिमखबर डेस्क

सीबीएसई ने कक्षा नौवीं और दसवीं के लिए नया पाठ्यक्रम जारी किया है। यह इसी सत्र से लागू होगा। इसमें कई अहम बदलाव किए गए हैं। अब प्रत्येक छात्र को तीन भाषाएं पढऩी होंगी, जिनमें से दो भारतीय भाषाएं होना अनिवार्य है। तीसरी भाषा में उत्तीर्ण हुए बिना छात्र 10वीं बोर्ड परीक्षा में शामिल नहीं हो सकेंगे। विद्यार्थी हिंदी और अंग्रेजी के साथ एक अन्य भाषा ले सकते हैं। वहीं दिव्यांग को एक भाषा पढऩे की छूट है।

नौवीं कक्षा के लिए यह नया ढांचा 2026-27 शैक्षणिक सत्र से लागू होगा, जबकि दसवीं कक्षा के लिए इसे अगले सत्र (2027-28) से प्रभावी किया जाएगा। गणित-विज्ञान विषयों में अब दो कोर्स लेवल- मानक (स्टैंडर्ड) व एडवांस होंगे। मानक सभी के लिए अनिवार्य होगा, जबकि एडवांस ऐच्छिक रहेगा। एडवांस कोर्स चुनने पर अतिरिक्त 25 अंकों की परीक्षा देनी होगी।

इसमें उत्तीर्ण होने पर माक्र्सशीट में ‘एडवांस लेवल पास’ अंकित रहेगा। पर अंक कुल स्कोर में नहीं जोड़े जाएंगे। प्रश्नपत्र में 50 प्रतिशत प्रश्न केस स्टडी, डाटा की समझ और परिस्थितियों पर होंगे। उत्तीर्ण होने के लिए 33 फीसदी अंक लाने होंगे। नौवीं कक्षा में व्यक्ति और समाज तथा कक्षा 10वीं में पर्यावरण शिक्षा जरूरी होगी।

कम्प्यूटेशनल थिंकिंग और एआई की पढ़ाई भी अनिवार्य की गई है। कला, शारीरिक और व्यावसायिक शिक्षा को मुख्य विषयों का दर्जा मिला है। यह नई नीति नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क फॉर स्कूल एजुकेशन 2023 के मानकों और डिजाइन पर आधारित है।

तर्कसंगतता को मिलेगा बढ़ावा

इस नए सिलेबस का मकसद गणित को केवल गणना के रूप में नहीं, बल्कि सोचने के एक अनुशासित तरीके के रूप में पढ़ाया जाएगा, जो तर्कसंगतता और समस्या-समाधान क्षमता को बढ़ावा देता है। विज्ञान में तथ्यों को रटने के बजाय गहरी वैचारिक समझ और वैज्ञानिक ज्ञान को स्वास्थ्य, पर्यावरण और स्थिरता जैसे मुद्दों पर लागू करने पर ध्यान केंद्रित किया गया है।

भाषाओं के विकल्प

छात्रों के पास चुनने के लिए हिंदी, अंग्रेजी और 42 अन्य भाषाओं का विकल्प होगा। इन विकल्पों में भारत के संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल सभी भाषाएं, अन्य भारतीय क्षेत्रीय भाषाएं और विदेशी भाषाएं शामिल हैं। छात्र जिन दो अनिवार्य स्तरों पर भाषाओं का चयन करेंगे, वे अलग-अलग होनी चाहिए। एक ही भाषा को एक से अधिक स्तर पर एक साथ नहीं लिया जा सकता है। भाषा पाठ्यक्रम का मुख्य उद्देश्य छात्रों में सुनने, बोलने, पढऩे और लिखने के कौशल में प्रभावी दक्षता विकसित करना है।

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