रौनक का कहना है कि किन्नौर जैसे पहाड़ी क्षेत्रों में अकसर सड़क हादसे होने पर वाहन गहरी खाई अथवा नदियों में गिर जाते हैं। कई दिनों तक वाहनों और इनमें सवार लोगों की जानकारी नहीं मिलती है।
हिमखबर डेस्क
दुर्घटना होने पर अब चालक के परिजनों और पुलिस को गाड़ी ही खुद इमरजेंसी कॉल करेगी। कॉल के साथ गाड़ी संदेश और जीपीएस लोकेशन भी भेजेगी। गाड़ी में लगे क्रैश डिडेक्टिंग सिस्टम से यह संभव हो सकेगा।
इस उपकरण की मदद से दुर्घटना होने पर घायलों को इमरजेंसी में मदद हासिल हो सकेगी। किन्नौर के भावानगर के प्रोजेक्ट सीनियर सेकेंडरी स्कूल के जमा दो कक्षा के छात्र रौनक ने सेंसर तकनीक से ऐसा मॉडल बनाया है।
हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्यों में बेहद कारगर साबित हो सकता है। छात्र रौनक ने इस उपकरण को कार क्रैश डिडेक्टिंग सिस्टम नाम दिया है। इस उपकरण के प्रोटोटाइप को एनआईटी हमीरपुर में चल रहे तीन दिवसीय राज्यस्तरीय बाल विज्ञान सम्मेलन में प्रदर्शित किया है।
किन्नौर जिला से ताल्लुक रखने वाले रौनक ने सड़क दुर्घटनाओं में वाहनों के गहरी खाई या नदियों में न गिरने के बाद नहीं मिलने की घटनाओं को देखते हुए यह मॉडल तैयार किया है।
यह सेंसर से इनपुट लेकर उपकरण में लगे एसआईएम 800 मॉडयूल को संदेश देगा। यह मॉडयूल एक सिम कार्ड की तरह कार्य करेगा, जिसमें रिचार्ज किया जाना जरूरी होगा। इस सिम कार्ड में फीड इमरजेंसी नंबर से पहले से फीड किए गए नंबर पर कॉल और संदेश चला जाएगा।