शिवरात्रि: 300 साल बाद महाशिवरात्रि पर दुर्लभ संयोग, इन राशियों में बन रहे चार शक्तिशाली राजयोग

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शाहपुर – नितिश पठानियां

महाशिवरात्रि का त्योहार 15 फरवरी को मनाया जाएगा। भगवान शिव को समर्पित यह पर्व हर साल फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को धूमधाम से मनाया जाता है। इस साल महाशिवरात्रि का त्योहार और भी खास रहने वाला है, क्योंकि इस दिन 300 वर्ष बाद एक दुर्लभ संयोग बनने जा रहा है।

शाहपुर के ज्योतिषी पंडित आचार्य अमित कुमार शर्मा ने बताया कि इस बार महाशिवरात्रि पर पांच राजयोग 10 शुभ योग बन रहे हैं। उन्होंने बताया कि महाशिवरात्रि के दिन कुंभ राशि में चार शक्तिशाली राजयोग बन रहे हैं।

इस दिन बुध-सूर्य की युति से बुधादित्य राजयोग, बुध-शुक्र की युति से लक्ष्मी नारायण राजयोग, सूर्य-शुक्र की युति से शुक्रादित्य योग बनेगा। इसके अलावा शनि अपनी मूल त्रिकोण राशि कुंभ में रहकर शश नामक महापुरुष राजयोग बना रहे हैं।

कुंभ राशि में सूर्य, बुध, शुक्र और राहु के एकसाथ होने से चतुग्र्रही योग भी बन रहा है। उन्होंने बताया कि ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति एक साथ कई शुभ योगों का निर्माण कर रही है। भगवान शिव को अत्यंत प्रिय श्रवण नक्षत्र का प्रभाव भी इस पर्व को और खास बना देगा। इसके साथ व्यतिपात, वरियान, ध्रुव और राजयोग जैसे कई शक्तिशाली योग भी सक्रिय रहेंगे।

ज्योतिषी पंडित आचार्य अमित कुमार शर्मा ने बताया कि फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी 15 फरवरी को शाम 5 बजकर 04 मिनट से लेकर 16 फरवरी को शाम 5 बजकर 34 मिनट तक रहने वाली है। ऐसे में महाशिवरात्रि का त्योहार 15 फरवरी को ही मान्य है। इस दिन शाम 04:47 बजे से 06:11 बजे तक राहुकाल भी रहेगा, जिसमें पूजा-पाठ या धार्मिक अनुष्ठान से बचना चाहिए।

इन राशियों पर बरसेगी शिव की कृपा

इस दिन बुध, मंगल और चंद्रमा का नक्षत्र परिवर्तन भी होगा। बुध पूर्वाभाद्रपद, मंगल धनिष्ठा और चंद्रमा श्रवण नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। यह दुर्लभ संयोग चार राशियों मेष, मिथुन, धनु व मकर के लिए विशेष रूप से शुभ माना जा रहा है।

महाशिवरात्रि पारण समय

महाशिवरात्रि का व्रत रखने वाले भक्त 16 फरवरी को सुबह 06 बजकर 59 मिनट से लेकर दोपहर 03 बजकर 24 मिनट के बीच व्रत का पारण कर सकते हैं।

महाशिवरात्रि 2026 के प्रमुख पूजा मुहूर्त

  • अभिजित मुहूर्त—दोपहर 12:13 बजे से 12:58 बजे तक।
  • सांध्य काल मुहूर्त—शाम 07:28 बजे के बाद
  • निशिथ काल मुहूर्त—रात 12:09 बजे से देर रात 01:00 बजे तक।

चार प्रहर की पूजा का मुहूर्त

  • प्रथम प्रहर—15 फरवरी को शाम 06.11 बजे से 09.23 बजे तक।
  • दूसरा प्रहर—15 फरवरी की रात 09.23 बजे से 16 फरवरी की रात 12.35 बजे तक।
  • तीसरा प्रहर—16 फरवरी की रात 12.35 बजे से सुबह 03.47 बजे तक।
  • चौथा प्रहर—16 फरवरी को सुबह 03.47 बजे से सुबह 06.59 बजे तक।

क्या है महाशिवरात्रि पर्व का रहस्य

इस दिन भगवान शिव के साधक अपने आराध्य देवता का पूरे विधि-विधान से पूजा-अर्चना करते हैं। हिंदू मान्यता के अनुसार इसी पावन तिथि पर देवों के देव महादेव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। भोले के भक्तों की मान्यता है कि जो कोई व्यक्ति महाशिवरात्रि पर विधि-विधान से शिवपूजा, जप, तप और व्रत करता है, उस पर शिव और पार्वती दोनों की कृपा बरसती है।

पूजा विधि

शिवरात्रि पर ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर व्रत का संकल्प लें। पूरे दिन उपवास रखें या फलाहार करें। शाम को या रात के चारों प्रहर में शिवलिंग का दूध, दही, शहद, घी और जल (पंचामृत) से अभिषेक करें। बेलपत्र, भांग, धतूरा, सफेद फूल और चंदन अर्पित करें। ‘? नम: शिवाय’ मंत्र का जाप करते हुए आरती करें।

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