हिमखबर डेस्क
मंडी जिले के बल्ह उपमंडल के अंतर्गत रिवालसर के सरकीधार में हुई महिला बौद्ध भिक्षु की नृशंस हत्या के मामले में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। इस जघन्य हत्याकांड में एक नाबालिग भी शामिल था। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए नाबालिग को हिरासत में लेकर जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के समक्ष पेश किया, जहां से उसे बाल सुधार गृह ऊना भेज दिया गया है।
डीएनए रिपोर्ट ने बदली जांच की दिशा
इस हत्याकांड की गुत्थी सुलझाने में फोरेंसिक विज्ञान ने अहम भूमिका निभाई है। मृतका के शरीर से एकत्र किए गए नमूनों की जांच में विशेषज्ञों को चार से अधिक पुरुषों के डीएनए मिले थे। चार दिन पहले आई इस रिपोर्ट ने पुलिस के उन संदेहों की पुष्टि कर दी कि इस वारदात को किसी एक व्यक्ति ने नहीं, बल्कि एक संगठित समूह ने अंजाम दिया है। इस खुलासे के बाद पुलिस ने पकड़े गए सभी चारों आरोपितों के डीएनए सैंपल ले लिए हैं।
साक्ष्य मिटाने की नाकाम कोशिश
आरोपितों ने पुलिस को गुमराह करने और सबूत मिटाने के लिए शातिर तरीके अपनाए थे। आरोपितों ने पहचान छुपाने के लिए मृतका के पति का मोबाइल फोन चंडीगढ़ में बेच दिया था। पुलिस उस व्यक्ति की तलाश कर रही है जिसने यह फोन खरीदा और उसमें नई सिम सक्रिय की। गगन शर्मा ने साक्ष्य मिटाने के उद्देश्य से मृतका के कीपैड वाले फोन से अपनी दादी का सेव नंबर भी हटा दिया था, ताकि पुलिस उन तक न पहुंच सके। हालांकि, पुलिस ने आरोपितों की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त चाकू और मृतका का मोबाइल फोन सफलतापूर्वक बरामद कर लिया है।
तकनीकी साक्ष्यों पर टिकी जांच
पुलिस ने वारदात में इस्तेमाल की गई कार और आरोपितों के मोबाइल फोन को जब्त कर फोरेंसिक लैब भेज दिया है। पुलिस अधीक्षक के अनुसार, कार की लोकेशन हिस्ट्री और मोबाइल डेटा के विश्लेषण से इस हत्याकांड की पूरी साजिश का पर्दाफाश होने की उम्मीद है। पुलिस का कहना है कि फोरेंसिक रिपोर्ट और बरामद किए गए तकनीकी साक्ष्य इस मामले को सुलझाने में महत्वपूर्ण कड़ी साबित हो रहे हैं। हम इस साजिश की हर परत को खोलने के करीब हैं।
न्यायिक प्रक्रिया जारी
इस मामले में पकड़े गए तीन वयस्क आरोपितों को सोमवार को पुनः न्यायालय में पेश किया जाएगा। फिलहाल तीनों आरोपित चार दिन के पुलिस रिमांड पर हैं, जहां उनसे कड़ी पूछताछ की जा रही है। पुलिस का मानना है कि रिमांड के दौरान कुछ और महत्वपूर्ण जानकारियां हाथ लग सकती हैं।

