मज़दूर-किसान विरोधी नीतियां लागू करने का किया विरोध और लोकसभा चुनावों में हराने का लिया प्रण
मंडी – अजय सूर्या
मज़दूर संगठनों के राष्ट्रीय आह्वान पर आज मंडी में मज़दूरों ने पड्डल मैदान से बाज़ार होते हुए उपायुक्त कार्यालय तक रैली निकाली और मोदी सरकार के ख़िलाफ़ जोरदार प्रदर्शन किया जिसमें किसान सभा, महिला समिति, नौंजवान सभा, एसएफआई और एचपीएमआरए ने भी प्रदर्शन में भाग लिया।
प्रदर्शन का नेतृत्व सीटू के ज़िला अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह और राजेश शर्मा, हिमाचल किसान सभा के कुशाल भरद्वाज, नौंजवान सभा के सुरेश सरवाल महिला समिति की वीना वैद्य ने किया तथा आंगनबाड़ी यूनियन की हमिन्द्री शर्मा और बिमला,मिड डे मील की संतोष कुमारी और अहिल्या, मनरेगा व निर्माण यूनियन के गुरदास वर्मा और गोपेन्द्र शर्मा, रेहड़ी यूनियन के सुरेंद्र कुमार और प्रवीण कुमार फोरलेन के राजेन्द्र और ललित कुमार तथा एटक के ललित ठाकुर इंटक के नरेश शर्मा और संगत राम हिमाचल किसान सभा के ज़िला सचिव रामजी दास, जोगिन्दर वालिया नॉजवान्न सभा के संजय जम्वाल और अजय वैद्य जनवादी महिला समिति की जैवंती शर्मा और सुनीता विष्ट इत्यादि सहित डेढ़ हज़ार मज़दूरों ने भाग किया।
आज के प्रदर्शन में आंगनवाड़ी, मिड डे मील, रेहड़ी फहड़ी, फोरलेन, मनरेगा व निर्माण मज़दूर, सफ़ाई मज़दूर, सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट और आउटसोर्सिंग मज़दूरों ने हड़ताल की थी और मंडी ज़िला मुख्यालय पर केंद्र की मोदी सरकार के ख़िलाफ़ जोरदार तरीके से विरोध प्रदर्शन किया।

इस मौके पर भूपेंद्र सिंह ने बताया कि आज की हड़ताल का मुख्य आह्वान मोदी सरकार की मज़दूर विरोधी नीतियों का विरोध करना, बढ़ती महंगाई पर रोक लगाने के अलावा श्रम कानूनों को रद्द करने के फ़ैसले को वापिस लेना है।इसके अलावा किसानों की फसलों के लिए एमएसपी लागू करना और नये बिजली विधेयक को रद्द करवाना है।
भूपेंद्र सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार आंगनवाड़ी व मिड डे मील कार्यकर्ताओं को सरकारी कर्मचारी घोषित नहीं कर रही है और न ही उन्हें न्यूनतम वेतन दे रही है। इसी प्रकार सरकार ने मनरेगा के लिए बजट ज़रूरत से आधा ही रखा है जिसके कारण कहीं पर भी मज़दूरों को सौ दिनों का रोज़गार नहीं मिल रहा है।
यही नहीं केंद्र सरकार मनरेगा मज़दूरों को मात्र 212 रु दिहाड़ी ही अदा कर रही है। सरकार ने रेहड़ी फहड़ी वालों के अधिकार के लिए 2014 में बने स्ट्रीट वेंडरज क़ानून को भी रद्द करने का निर्णय लिया है जिससे इनके रोजगार की गारंटी समाप्त हो जाएगी।
मोदी सरकार सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को अपने पूंजीपति दोस्तों को कौड़ियों के भाव बेच रही है और सामाजिक सुरक्षा के लिए बने क़ानून निरस्त करने में लगी है इसलिए मज़दूर आने वाले लोकसभा चुनावों में मोदी सरकार को सत्ता में न आने के लिए काम करेंगे।

हिमाचल किसान सभा के कुशाल भारद्धाज ने कहा कि पिछले किसानों के 376 दिल्ली घेराव के बाद तीन काले कृषि क़ानून तो निरस्त कर दिए थे लेकिन उन्हें एमएसपी की गारंटी देने बारे दिए आश्वाशन को अभी तक भी लागू नहीं किया है और अब जब किसानों ने 13 फ़रवरी से दोबारा दिल्ली मार्च शुरू किया है तो उन्हें रोकने के लिए सड़कों पर कीलें गाड़ दी है और उनपर लाठीचार्ज और आँशु गैस के गोले दागे जा रहे हैं जो सरकार के किसान विरोधी चरित्र का पर्दाफ़ाश करता है।
किसानों के ऊपर बनाये गए झूठे केस भी अभी तक वापिस नहीं लिए गए हैं और खेड़ी में किसानों को कुचल कर मारने वाले कातिलों को भी नहीं पकड़ा गया है।सुरेश सरवाल ने कहा कि मोदी सरकार ने देश में 5 करोड़ युवाओं को रोज़गार देने का वादा किया था लेकिन रोज़गार के बजाये युवाओं का ध्यान मंदिर-मस्जिद औऱ हिन्दू-मुस्लिम के काल्पनिक विवाद में भटकाया जा रहा है।
वहीं जनवादी महिला समिति की ज़िला अध्यक्षा विना वैद्य ने कहा कि मोदी सरकार के कार्यकाल में महिलाओं के ऊपर हिंसा और अत्याचार बढ़े हैं और उन्हीं की पार्टी के नेता इन अत्याचारों में संलिप्त रहे हैं लेक़िन उन पर कोई कार्यवाई नहीं हुई है और सभी स्वायत संस्थानों पर भाजपा व आरएसएस ने जोरजबरदस्ती कब्ज़ा कर लिया है और आम जनता की आवाज़ को दबाया जा रहा है। इसलिए इस मज़दूर, किसान, महिला, युवा व आमजनता विरोधी सरकार को आने वाले चुनावों में सत्ता में न आने के लिए सभी को एकजुटता बना कर काम करना होगा।

