
आठ किलोमीटर का यह रास्ता बहा रहा अपनी बदहाली पर आंसू । सीजनल इन क्षेत्रों की और जाने बाले पशु पालकों तथा भेड़पालकों को को आ रही कठनाई । लोग बन बिभाग की कार्यप्रणाली पर लगा रहे कई सवालिया निशान ।
सिहुंता – अनिल संबियाल
गौरतलब हो कि तहसील मुख्यालय सिहुंता से लगभग 23 किलोमीटर दूर जहां पर कि एक और तो धर्मिक स्थान है ।यहां पर सदियों पुराना एक शिव मंदिर है तो दूसरी ओर सिहुंता क्षेत्र की 23 पंचायतों के कुछ लोग सीजनल अपने पशुओं के साथ इस क्षेत्र में जाते हैं ।
बता दें किइस नडाल नामक स्थान को जाने बाला रास्ता लगभग 8 किलोमीटर के एरिया में कई जगह टुटा हुआ है । जिससे कि लोगों को आने जाने में बहुत कठनाई का सामना करना पड़ रहा है । लोगों को अपनी जान जोखिम में डाल कर यह धार्मिक यात्रा करनी पड़ रही है ।
बता दें कि की इस रास्ते के साथ साथ कई मीटर गहरी खाईयां हैं । अगर एक बार आदमी का पैर फिसल जाय तो आदमी की जिंदगी का बच पाना न मुमकीन है । इस रास्ते में कई पशु गिर कर मर जाते हैं । गुजर समुदाय के लोगों को अपनी भैसें कई किलोमीटर दूसरे लम्बे रास्ते से होकर ले जानी पड़ती हैं ।
साबन के महीने में तथा सिंतबर के महीने में नाहोंन के पर्ब पर हजारों श्रद्धालु इस नडाल नामक स्थान की ओर अपना रुख करेगें ।
बताते चलें कि जानकारी के मुताबिक यह सारा रास्ता बन भूमि पर बन विभाग ने हो बनाया है और साल में दो बार बन बिभाग ही इस रास्ते की रिपेयर करता आया है परंतु पिछले कई बर्षों से बन बिभाग इसकी अनदेखी करता आया है । लोगों ने बन बिभाग के उच्चाधिकारियों से इस रास्ते की रिपेयर करने की गुहार लगाई है ।
क्या कहते है अधिकारी
इस संदर्भ में जब वन मंडलाधिकारी डलहौजी कमल भारती से दुरभाष पर बात हुई तो उन्होंने कहा कि संबंधित वनकर्मियों को कह दिया जायेगा कि बह उस रास्ते का एस्टिमेट बना कर यहां भेजें । मैं जल्द जिलादीश महोदय से बजट के लिये आग्रह करुंगा ।
