जल शक्ति विभाग ने 25आउटसोर्स कर्मियों को दिखाया बाहर का रास्ता, आउटसोर्स कर्मियों में रोष

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ज्वाली – अनिल छांगु

हिमाचल प्रदेश की सत्तासीन सुक्खू सरकार प्रतिवर्ष एक लाख बेरोजगारों को रोजगार देने का वादा कर रही है लेकिन आउटसोर्स कर्मियों को बाहर का रास्ता दिखाया जा रहा है। आउटसोर्स कर्मियों को बाहर का रास्ता दिखाकर बेरोजगारी की तरफ धकेल जा रहा है।

विधानसभा क्षेत्र ज्वाली में जल शक्ति विभाग में कार्यरत 25 आउटसोर्स कर्मियों को बाहर निकाल दिया गया है जिससे आउटसोर्स कर्मियों में सत्तासीन सरकार के खिलाफ रोष व्याप्त है।

आउटसोर्स कर्मी गणेश राज, सन्तोष कुमार, सुजान सिंह, हितेश, अजय कुमार, साहिल पठानिया, ईशान, सचिन, गोल्डी, मनोज कुमार, रजत, अर्जुन सिंह, मनोज कुमार, वरुण व रजत इत्यादि ने कहा कि हमें शिमला क्लीन बेस कंपनी द्वारा पिछली भाजपा सरकार के कार्यकाल में चार साल पहले बतौर आउटसोर्स रखा गया था तथा हम दूरदराज की वाटर सप्लाई स्कीमों में कार्य करते रहे तथा हमें तीन हजार रुपए पगार मिलती थी।

उन्होंने कहा कि हमें उम्मीद थी कि हमारे लिए कोई न कोई नीति बनाई जाएगी लेकिन कांग्रेस सरकार ने सत्तासीन होते ही हमको बाहर का रास्ता दिखा दिया जिस कारण हम बेरोजगार हो गए। हमें अपने परिवार का पालन-पोषण करना मुश्किल हो गया है। आख़िरकार अब जाएं भी तो कहां जाएं।

उन्होंने मांग रखी है कि जल शक्ति विभाग में 58 वैकेंसी हैं तथा उनकी जगह हमें रखा जाए। उन्होंने कहा कि हम अपनी समस्या को लेकर कृषि मंत्री चंद्र कुमार के पास गए लेकिन हमारी समस्या का समाधान नहीं किया गया।

उन्होंने कहा कि जल शक्ति विभाग के अधिशाषी अभियंता के पास गए तो कहा गया कि जिस कंपनी के अधीन हम काम कर रहे थे, उसका टेंडर रद्द हो गया है। आउटसोर्स कर्मियों का प्रतिनिधिमंडल भाजपा नेता संजय गुलेरिया से उनके कार्यालय लब में मिला था अपनी व्यथा सुनाई।

भाजपा नेता संजय गुलेरिया ने कहा कि प्रदेश में भाजपा की सरकार होती तो आपकी मांग को सरकार तक पहुंचाकर हल करवाया जाता लेकिन कांग्रेस सरकार अंधी बहरी हो चुकी है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की सत्तासीन सरकार को आउटसोर्स कर्मियों को बाहर निकालने की बजाए उनके हित में पॉलिसी बनानी चाहिए ताकि वे बेरोजगार न हों। उन्होंने कहा कि आउटसोर्स कर्मियों को बाहर निकालना तर्कसंगत नहीं है।

विभागीय अधिशाषी अभियंता के बोल

वहीं जल शक्ति विभाग ज्वाली के अधिशाषी अभियंता अजय कुमार ने कहा कि इनको कंपनी द्वारा रखा गया था तथा अब कंपनी का टेंडर रद्द हो गया है तो इन्हें निकाल दिया गया। उन्होंने कहा कि इनको मर्ज करना या न करना सरकार का पॉलिसी मैटर है जिसमें हम कुछ नहीं कर सकते।

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