बिलासपुर – सुभाष चंदेल
हिमाचल प्रदेश के लोगों को अब अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) बिलासपुर में बेहतरीन स्वास्थ्य सेवाएं मिलेंगी। अस्पताल में अब एडवांस फेकोमल्सीफिकेशन मशीन के जरिये आंखों के ऑपरेशन किए जाएंगे। यह अत्याधुनिक मशीन वर्तमान में उपयोग की जा रही साधारण फेको मशीनों की तुलना में कहीं अधिक सुविधाजनक व सटीक मानी जा रही है।
नाजुक हिस्सों को नुकसान की आशंका न्यूनतम
इस नई मशीन के आने से मोतियाबिंद के मरीजों को विश्वस्तरीय उपचार की सुविधा मिलेगी। मशीन अपनी उच्च श्रेणी की तकनीक के कारण सर्जन को ऑपरेशन के दौरान बेहतर नियंत्रण प्रदान करती है। इससे आंखों के भीतर के नाजुक हिस्सों को नुकसान पहुंचने की आशंका न्यूनतम हो जाती है।
तेजी से होती है मरीज की रिकवरी
इस मशीन से होने वाले आपरेशन के बाद मरीज की रिकवरी तेजी से होती है और उसे अस्पताल में रुकने की जरूरत नहीं पड़ती। यह मशीन आंखों के भीतर के दबाव को स्थिर रखती है, जिससे आपरेशन के दौरान खतरा कम होता है।
नहीं होती टांके की आवश्यकता
एडवांस तकनीक के कारण आपरेशन के लिए बेहद सूक्ष्म छेद किया जाता है, जिसमें टांके की आवश्यकता नहीं होती। जो मोतियाबिंद बहुत सख्त हो चुके होते हैं, उन्हें भी यह मशीन आसानी से और सुरक्षित तरीके से साफ कर सकती है।

