हिमखबर डेस्क
आज के डिजिटल दौर में आपकी जेब में रखा मोबाइल सिर्फ एक गैजेट नहीं, बल्कि आपके बैंक लॉकर की चाबी है। लेकिन क्या आपने सोचा है कि अगर अचानक आपके फोन से नेटवर्क गायब हो जाए, तो यह कोई तकनीकी खराबी नहीं बल्कि आपकी जिंदगी भर की कमाई लुटने की शुरुआत हो सकती है? साइबर अपराधी अब ‘सिम स्वैप’ के जरिए बिना आपको भनक लगे आपका बैंक खाता खाली कर रहे हैं।
कैसे बुना जाता है यह ‘अदृश्य’ जाल?
सिम स्वैप फ्रॉड कोई जादू नहीं, बल्कि एक सोची-समझी साजिश है। सबसे पहले ठग सोशल मीडिया या फिशिंग लिंक के जरिए आपका आधार नंबर, पैन और बैंक डिटेल्स जुटाते हैं।इसके बाद वे टेलीकॉम कंपनी के पास जाकर फर्जी दस्तावेजों के जरिए दावा करते हैं कि आपकी सिम खो गई है या खराब हो गई है। कंपनी उस नंबर की नई सिम ठगों को जारी कर देती है।
जैसे ही नई सिम सक्रिय होती है, आपके फोन का सिग्नल पूरी तरह गायब हो जाता है। अब बैंक के सारे ओटीपी (OTP) और अलर्ट्स आपके पास नहीं, बल्कि अपराधी के फोन पर जाते हैं। चंद मिनटों में आपका खाता साफ कर दिया जाता है।
इन दो मामलों ने पुलिस की चिंता बढ़ाई
शिमला में एक होटल व्यवसायी का फोन अचानक ‘नो सर्विस’ मोड पर चला गया। जब तक वे इसे नेटवर्क की समस्या समझकर ठीक करवाते, ठगों ने उनके खाते से डेढ़ लाख रुपये उड़ा दिए थे। वहीं सोलन में यहाँ एक बुजुर्ग महिला का सिम बंद होते ही उनके खाते से 80 हजार रुपये निकाल लिए गए। जब तक परिवार बैंक पहुँचता, लुटेरे अपना काम कर चुके थे।
पुलिस महानिदेशक अशोक तिवारी ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि मोबाइल नेटवर्क का अचानक चले जाना एक गंभीर संकेत है। उन्होंने जनता से अपील की है कि तकनीकी खराबी मानकर बैठने के बजाय तुरंत बैंक और कंपनी से संपर्क करें।
खुद को सुरक्षित रखने के ‘गोल्डन रूल्स’
बैंक खाते के लिए सिर्फ SMS नहीं, बल्कि ईमेल अलर्ट भी अनिवार्य रूप से सक्रिय रखें। अपने मोबाइल ऑपरेटर से संपर्क कर ‘सिम लॉक’ या ‘पोर्ट-आउट पिन’ की सुविधा लें। कभी भी फोन पर ओटीपी, पिन या आधार की जानकारी साझा न करें। अपनी निजी जानकारी इंटरनेट पर सार्वजनिक न करें। अगर फोन का नेटवर्क अचानक गायब हो जाए, तो तुरंत दूसरे फोन से बैंक को सूचित कर खाता फ्रीज करवाएं और 1930 हेल्पलाइन पर रिपोर्ट करें।

