हिमखबर डेस्क
हिमाचल प्रदेश में कर्मचारियों का 15 फीसदी डीए लंबित है। इस बारे में विधानसभा के मानसून सेशन में भाजपा के त्रिलोक जम्वाल ने सवाल पूछा था। इसका लिखित जवाब मुख्यमंत्री सुक्खू ने दिया।
जवाब में कहा गया है कि प्रदेश की वित्तीय स्थिति को देखते हुए डीए के भुगतान में विलंब हो रहा है। राज्य सरकार ने वित्तीय स्थिति ठीक करने के लिए प्रभावी कदम उठाए हैं और बेहतर वित्तीय प्रबंधन की प्रक्रिया जारी है। आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होते ही सारा भुगतान कर दिया जाएगा।
सीएम सुक्खू के जवाब के अनुसार हिमाचल प्रदेश में सरकार के अधीन विभिन्न विभागों में दो तरह के नियमित कर्मचारी सेवाएं दे रहे हैं। कुछ कर्मियों ने नई पेंशन योजना (एनपीएस)/यूनिफाइड पेंशन स्कीम (यूपीएस) अपना रखी है। दूसरे वे कर्मचारी हैं, जो पुरानी पेंशन योजना यानी ओपीएस के अधीन हैं।
प्रदेश सरकार एनपीएस/यूपीएस के अधीन कार्यरत कर्मचारियों को केंद्र सरकार की तर्ज पर वर्तमान में 60 प्रतिशत महंगाई भत्ता प्रदान कर रही है। इसका कारण यह है कि केंद्र सरकार और हिमाचल प्रदेश सरकार के महंगाई भत्ते की दरों में अंतर था।
राज्य सरकार की डीए दर कम होने के कारण कर्मचारियों के एनपीएस/यूपीएस खाते में अंशदान कम जमा हो रहा था। इससे उनके भविष्य के पेंशन लाभ प्रभावित हो रहे थे। ऐसे में इन कर्मचारियों की महंगाई भत्ते की कोई भी किस्त लंबित नहीं है।
सुक्खू ने कहा कि ओपीएस वाले कर्मियों को राज्य सरकार 15 अक्टूबर 2025 से 45 प्रतिशत महंगाई भत्ता दे रही है। केंद्र सरकार में वर्तमान में यह दर 60 प्रतिशत है। इस प्रकार राज्य सरकार के ओपीएस में आने वाले कर्मचारियों की महंगाई भत्ते की छह किस्तें यानी कुल 15 प्रतिशत डीए वर्तमान में लंबित हैं।
इनमें 1 जुलाई 2023 से 1 प्रतिशत, 1 जनवरी 2024 से 4 प्रतिशत, 1 जुलाई 2024 से 3 प्रतिशत, 1 जनवरी 2025 से 2 प्रतिशत, 1 जुलाई 2025 से 3 प्रतिशत और 1 जनवरी 2026 से 2 प्रतिशत महंगाई भत्ता शामिल है।
सीएम की तरफ से महंगाई भत्ते की किस्त संबंधी घोषणा के उपरांत वित्त विभाग इस संदर्भ में डीए की अधिसूचना जारी करता है। सीएम ने बताया कि आर्थिक स्थिति ठीक होते ही सारा भुगतान कर दिया जाएगा।



