हिमखबर डेस्क
जिला कांगड़ा के इंदौरा क्षेत्र में लगातार हो रहे अवैध खनन से एक निजी विश्वविद्यालय पर भी बर्बादी के बादल मंडराने शुरू हो गए हैं। लोगों की माने तो विभाग और प्रशासन के सामने सरेआम खड्डों का सीना छलनी किया जा रहा है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर दोनों चुप बैठे हुए है।
कोई चाहे जितनी मर्जी अवैध खनन की शिकायतें कर ले, इंदौरा में खनन माफिया का बाल भी बांका नहीं होने वाला। इस बात को लेकर इंदौरा की जनता में प्रदेश सरकार के प्रति भी भारी रोष है।
अवैध खनन की यह शिकायतें विशेष रूप से इंदौरा के वार्ड नंबर 11 में ब्यास दरिया, कंदरोड़ी में छौंछ खड्ड व काठगढ़ मंदिर के पास मुख्य सडक़ पर बने पुल के साथ ऊपर और नीचे और निजी यूनिवर्सिटी के ऊपर व नीचे की तरफ भारी मात्रा में अवैध खनन हो रहा है।
यदि आने वाली बरसात में ब्यास दरिया का जलस्तर पिछले वर्ष की भांति फिर से बढ़ता है, तो नदी किनारे हो रहे अवैध खनन के कारण कटाव और भूस्खलन का खतरा कई गुना बढ़ जाएगा। इससे निजी यूनिवर्सिटी के प्रांगण को भारी नुकसान पहुंच सकता है और छात्रों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ सकती है।
बिना परमिशन निकाली जा रही रेत-बजरी
ज्ञात रहे कि किसी भी क्रशर के संचालन के लिए खनन विभाग एक वैध खनन पट्टा जारी करता है, जिससे उक्त क्रशर का संचालन होता है, परंतु खनन विभाग की मिलीभगत से कई क्रशर संचालकों के खनन पट्टों में या तो खनन सामग्री समाप्त हो चुकी है, या फिर उन्होंने सिर्फ दिखावे के लिए खनन पट्टे ले रखे हैं।
नुरपुर क्षेत्र में बहुत से स्टोन क्रशर ऐसे हैं, जिन्होंने आज तक अपने खनन पट्टों में खनन ही नहीं किया और कुछ क्रशर ऐसे भी हैं, जिनके खनन पट्टों में खनन सामग्री ही समाप्त हो चुकी है।
सरकारी राजस्व को नुकसान
सरकार की भूमिका पर भी गंभीर प्रश्न खड़े हो रहे हैं। खनन से जहां एक ओर सरकारी राजस्व को नुकसान हो रहा है, वहीं दूसरी ओर पर्यावरण संतुलन भी बिगड़ता जा रहा है। इसके बावजूद सरकार द्वारा इस समस्या पर आंखें मूंदे रखना जनता में रोष का कारण बन गया है।
पंजाब जा रही खनन सामग्री
स्थानीय लोगों का आरोप है कि ब्यास दरिया और निजी यूनिवर्सिटी के आसपास से निकाली गई खनन सामग्री को पंजाब में लगे स्टोन क्रशरों में बेचा जा रहा है।

