
जेई व क्लर्क डेपुटेशन पर व सचिव का पद खाली.. पंचायत में बिना बैटरियों से 150 सोलर लाइट्स बनी शोपीस
ज्वाली – व्यूरो रिपोर्ट
नगर पंचायत ज्वाली तेरी कौन करे रखवाली। जी हां भले ही ज्वाली को नगर पंचायत का दर्जा मिल गया हो लेकिन सुविधाओं के नाम पर कुछ भी हासिल नहीं हो पाया है। वर्ष 2016 में अस्तित्व में आई नगर पंचायत ज्वाली मूलभूत सुविधाओं को तरस रही है।
नगर पंचायत को आजतक न तो नियमित सचिव मिल पाया है और न ही जेई। क्लर्क को भी नूरपुर से डेपुटेशन पर लगाया गया है। अन्य स्टाफ के सहारे ही नगर पंचायत को चलाया जा रहा है। आजतक नगर पंचायत पंचायत ज्वाली में सीवरेज नहीं बन पाई हैए गलियों में लाइटों का प्रावधान नहीं हो पाया तथा जो हाईमास्ट लाइटें कैहरियां व लब चौक में लगी हैं वो पिछले एक साल से बन्द पड़ी हैं।
पंचायत समय में लगाई गई 150 सोलर लाइटें बैटरियों के अभाव में शोपीस बनी हुई हैं। बाजारों में नगर पंचायत ज्वाली द्वारा कहीं भी सीसी कैमरे नहीं लगाए गए हैं। बेलिंग मशीन को जंग खा रहा है तथा नगर पंचायत की अपनी डंपिंग साइट भी नहीं है। डंपिंग साइट को लीज पर लिया गया है।
ज्वाली को वर्ष 2016 में तत्कालीन मुख्य संसदीय सचिव नीरज भारती ने नगर पंचायत का दर्जा दिलवाया तथा एक साल तक इसको स्टाफ मुहैया करवाने में असमर्थ दिखे। उस समय एसडीएम ज्वाली को नगर पंचायत में सचिव का दायित्व सौंपा गया तथा जेई को आउटसोर्स पर लगाया गया।
वर्ष 2017 में सत्ता परिवर्तन हुआ तो भाजपा के विधायक अर्जुन सिंह बन गए जिनके द्वारा स्टाफ मुहैया करवाने की बजाए आधे गांवों को बाहर करके पंचायत बना दिया गया तथा नगर पंचायत में भाजपा समर्थित चेयरमैन बनाया गया।
तब तहसीलदार ज्वाली को सचिव का दायित्व दिया गया तथा आउटसोर्स पर जेई लगाया गया। पर्याप्त स्टाफ मुहैया करवाने में कोई दिलचस्पी नहीं ली। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि नगर पंचायत ज्वाली में नियमित सचिव व जेई की नियुक्ति की जाए।
