हिमाचल में पटवारी-कानूनगो के स्टेट कैडर पर विवाद, कर्मचारियों ने किया विरोध

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हिमाचल में पटवारी-कानूनगो के स्टेट कैडर पर विवाद, कर्मचारियों ने किया विरोध

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ज्वाली – शिवू ठाकुर 

पटवारी ज़िला से स्टेट कैडर ने कहा कि किसी भी विषय में कम जानकारी घातक सिद्ध होती है। पटवारी के काम को केवल प्रमाण पत्रों की तस्दीक व मामूली ज़मीन के कार्यों तक ही सीमित समझने वाले लोगों के द्वारा ही पटवारी की छवि ऐसी बनाई गई है कि वे उस से बढ़कर और कभी सोच ही नहीं पाते।

उनके नज़रिये से तो पटवारी को फ्री की तनख्वाह मिलती है। उनका बस चले तो वो पटवारी बनने को ही अपराध घोषित कर दें। मामला यहाँ ज़िला कैडर में हुई भर्ती, ज़िला स्तर पर ज़मीन की अलग अलग (पैमाइश, पैमाने ) ज़िला स्तर की ट्रेनिंग व सीनियोरिटी का है।

हिमाचल में एक जिला की पैमाइश अन्य जिलों से भिन्न है जैसे कनाल मरले, बीघा बिस्वा, मीटर कर्म। ये कोई स्कूली पढ़ाई की पाइथागोरस थेओरम नहीं है जो हर ज़िला में एक सी पढ़ाई जायेगी।

हर ज़िला की अपनी बोली अलग है, और बुजुर्गों का क्या, कांगड़ा- ऊना का व्यक्ति क्या कुल्लू, किन्नौर की लोकल बोली समझ पायेगा। उनके कार्य क्या ठीक से ककर पायेगा खासकर विवादित सीमांकन वाले केस में समझा पायेगा।

वहाँ के रिवाज, बोली जब तक समझ में आयेगी, कहीं नई बोली वाले ज़िला में तबादला हो जायेगा। वहीं किसी भी कर्मचारी के लिये सबसे अधिक ख़ुशी की बात है उसकी पदोन्नति।

चिंता की बात है कि ज़िला स्तर पर बनी सीनियोरिटी लिस्ट अब किस प्रकार से राज्य स्तर पर बनेगी, क्योंकि हर ज़िला में एक बैच के अलग अलग दिनाँक में आर्डर हैं, जोकि बड़े ज़िला जैसे कांगड़ा को नुकसान झेलना पड़ेगा। यहाँ के 10 बर्षों से पदोन्नति की आस लिये कर्मचारी ठगा हुआ महसूस करेंगे।

यह विभाग बाकी विभागों की तरह नहीं है, जिसमें हर ज़िला में एक सा काम होगा। 6 माह की महाल ट्रेनिंग लेकर ही कोई उस ज़िला में पटवारी लगने के योग्य बनता है। सरकार क्या सभी जिलों में 6-6 महीने की ट्रेनिंग करवाएगी अलग से अब?? क्या आपदा के समय में प्लेन का कोई पटवारी पहाड़ी पर उतना एक्सपर्ट होगा??

10 बर्ष के कार्यकाल में मैं 6-7 वर्ष दोहरे सर्किल में रहा हूँ, अभी भी दोहरे में ही हूँ। सरकार एक अतिरिक्त कर्मचारी का सालाना 3-4 लाख बचा रही है, और उसी पंक्ति में सरकार के 20 लाख दोहरे सर्किल की वजह से बचे हैं, पर क्या मैं एक साथ दोनों तरफ के काम बखूबी कर पाऊँगा, जनता का परेशान होना लाज़मी है। प्रदेश के बाकी हिस्सों का भी यही हाल है।

आम जनता को फायदा सरकार द्वारा नई भर्ती निकाल कर खाली पड़े पटवारी, कानूनगो, तहसीलदार, अंशकालीन कर्मी के पदों को भरने से होगा, व पटवारियों पर बाकी विभागों के काम व ऑनलाइन वर्क eKYC, Pm Kisan, Agriculture census, Digital work, water body census, crop cutting experiments, Drone survey को कम करके होगा ताकि समयानुसार आम जनता के रोजमर्रा के कार्य हो सकें और रिटायर्ड लोगों को हटाकर पढ़े लिखे युवाओं को रोजगार मिल सके नाकि नेगेटिव कमेंट लिखने से।

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