स्टेट नारकोटिक्स क्राइम कंट्रोल यूनिट दवाओं के अवैध कारोबार पर कसेगी शिकंजा

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बीबीएन

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फर्जी बिलिंग के जरिए एनडीपीएस दवाओं के अवैध कारोबार की पड़ताल में जुटी स्टेट नारकोटिक्स क्राइम कंट्रोल यूनिट अब हिमाचल सहित पड़ोसी राज्यों में आरोपियों द्वारा मेडिकल स्टोर व थोक विक्रेता को की गईं आपूर्तिं की पड़ताल में जुट गई है। 100 करोड़ रुपए की मादक और साइकोट्रॅपिक दवाओं की अवैध बिक्री के इस मामले में एसएनसीसीयू ने राज्य दवा नियंत्रण प्रशासन से अनुरोध किया है कि वह यह जांच करें कि राज्य के किस खुदरा व थोक केमिस्ट की दुकानों में जैनेट फार्मास्युटिकल्स से दवाओं आपूर्ति की गई थी, ताकि अवैध बिक्री के नेटवर्क का पता चल सके। बता दें कि पड़ताल में सामने आया है कि मादक और साइकोट्रॉपिक दवाओं की अवैध बिक्री के मामले में घिरी जैनेट फार्मास्युटिकल्स द्वारा तीन-चार नशीले और साइकोट्रॉपिक दवाओं का बड़े पैमाने पर कारोबार कर रही थी। अब पूरे नेटवर्क को खंगालने के लिए राज्य दवा नियंत्रक प्राधिकरण के सहयोग से छानबीन को आगे बढ़ाने की कवायद चल रही है। प्रदेश में करीबन आठ हजार से ज्यादा खुदरा और थोक केमिस्ट की दुकानें हैं, जिनमें जैनेट से हुए कारोबार को खंगाला जाएगा।

यहां उल्लेखनीय है कि एनडीपीएस दवाओं के अवैध कारोबार के मामले में स्टेट सीआईडी के नारकोटिक्स क्राइम कंट्रोल यूनिट ने राज्य दवा नियंत्रक प्राधिकरण की शिकायत पर गत वर्ष बद्दी से जैनेट फार्मा ट्रेडिंग कंपनी के मालिक दिनेश बंसल व मैनेजर सोनू सैणी को गिरफ्तार किया। पड़ताल में सामने आया था कि कंपनी से निंरतर एनडीपीएस दवाओं की खेप राजस्थान और देश के अन्य हिस्सों में भेजी जाती थी, पिछले दो सालों में कपंनी नकली बिलों के जरिए 100 करोड़ से ज्यादा कीमत की एनडीपीएस दवाओं का कारोबार कर चुकी है। दिसंबर में छापेमारी के दौरान नाइट्राज़ेपम, कोडीन, एटिज़ोलम और अल्प्राज़ की एक बड़ी खेप जब्त की गई थी। एसएनसीसीयू यह पता लगाने में जुटी है कि इन दवाओं की किन-किन राज्यों में सप्लाई की गईं थी। अभियान की शुरुआत में हिमाचल की खुदरा और थोक दुकानों को खंगाला जाएगा। राज्य औषधि नियंत्रक नवनीत मारवाह ने बताया कि एसएनसीसीयू के अधिकारियों से अनुरोध प्राप्त होने के तुरंत बाद प्राधिकरण ने अधिकारियों को खुदरा, थोक दुकानों में जैनेट फार्मां द्वारा आपूर्ति की जा रही दवाओं के संबंध में पड़ताल के निर्दंेश दे दिए गए हैं

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