
व्यूरो, रिपोर्ट
गुरु की नगरी अपनी सोंदर्य और प्राकृतिक खूबसूरती के कारण जानी जाती है। खूबसूरती से सरोबार हिमाचल प्रदेश को देवों की भूमि भी कहा जाता है। ऐसा ही एक धार्मिक स्थल है देईजी साहिबा जिसका इतिहास किसी से छुपा नही है।
हिमाचल प्रदेश में अनेकों एतिहासिक और प्रसिद्ध धार्मिक स्थल आज भी मौजूद हैं। पांवटा साहिब में भी हिमाचल उत्तराखंड के प्रवेश द्वार पांवटा साहिब में यमुना नदी के किनारे बना ऐतिहासिक देईजी साहिबा ऐतिहासिक यादों को संजोए रखे हुए है।
गोर हो की जैसे शाहजहां ने अपनी बेगम मुमताज की याद में ताजमहल बनवाया ठीक वैसे ही रानी साहिबा कांगड़ा देईजी साहिबा ने अपने भाई महाराजा शमशेर प्रकाश बहादुर की मदद से अपने पति व लम्बागांव के राजा प्रताप चंद बहादुर की याद में करवाया था। जो आज भी यमुना नदी किनारे बना है ।
बता दें कि रघुनाथ मंदिर महाराजा सिरमौर शमशेर प्रकाश बहादुर द्वारा उनकी बहन के अनुरोध पर बनवाया था। राजकुमारी सिरमौर जिसे प्यार व आदर से देईजी साहिबा पुकारा जाता था। उनकी शादी लम्बागांव के राजा प्रताप चंद बहादुर से हुई थी।
वहीं ऐतिहासिक यादों को संजोए रखे इस मंदिर में रियासत काल में बने भगवान श्री राम, माता सीता व लक्ष्मण जी के संग हनुमान की मूर्तियां स्थापित हैं। मंदिर के पुजारी दीपक का कहना है कि सिरमौरी रानी ने भाई से अनुरोध करके पति के याद में इस मंदिर का निर्माण करवाया था।
उन्होंने कहा कि सिरमौर की रानी की कांगड़ा के राजा चंद से शादी तो हुई लेकिन वह अल्पायु में ही विधवा हो गई। जिस कारण इस मंदिर का निर्माण उन्होंने करवाया और इसका नाम देईजी साहिबा रखा गया।
