
सामाजिक क्रांति के शिखर पुरुष थे गौतम बुद्ध
हिमाचल प्रदेश भाषा, कला एवं संस्कृति विभाग के निर्देशन में सांस्कृतिक संगठन “सभ्याचारक रंग मंच” द्वारा “बुद्द जयंती” के अवसर पर “भारतीय संस्कृति में बौद्ध कला एवं संस्कृति का महत्व” विषय पर संसारपुर टेरेस में में ऑनलाइन सेमिनार का आयोकन किया गया I
इस अबसर पर सोशल मीडिया के माध्यम से युवाओं को महात्मा बुद्ध के उपदेशों एवं संस्कृति की जानकारी प्रदान की गई I
इसका शुभारंभ करते हुए सोशल ऐक्टिविस्ट नितीश राठौर ने कहा कि गौतम बुद्ध सामाजिक क्रांति के शिखर पुरुष थे I जाति-पांति, छुआ-छूत जैसा कोई भेद-भाव महात्मा बुद्ध दृष्टि में नहीं था और यही कारण था कि उन्होंने अपने संघ का द्वार सभी जाति के लिये खोल दिया था ।
एक सच्चे समाज सुधारक के रूप में वे अपने समकालीन समाज को जाति तथा धर्म के दोषों से मुक्त करना चाहते थे । बुद्ध जटिल दार्शनिक समस्याओं में कभी नहीं उलझे तथा एक नैतिक दार्शनिक के रूप में उन्होंने मनुष्य के नैतिक तथा सामाजिक गुणों के विकास पर ही बल दिया ।
इस अवसर पर सामाजिक कार्यकर्ता मनीषा देवी ने वताया कि बौद्ध संस्कृति के प्रमुख लक्षण अहिंसा, प्राणियों पर दया, सत्य, भाषण, माता-पिता की सेवा, गुरुजनों का सम्मान, ब्राह्मणों तथा श्रमणों को दान, मित्रों, परिचितों, सम्बन्धियों आदि के साथ अच्छा बर्ताव करना इत्यादि बताये गये हैं ।
ये बातें सभी धर्मों में समान रूप से श्रद्धेय मानी जाती हैं । बुद्ध के उपदेशों का लक्ष्य मानव जाति को उसके दुःखों से त्राण दिलाना था और इस रूप में उनका नाम मानवता के महान् पुजारियों में सदैव अग्रणी रहेगा । उनके उपदेशों में आद्योपान्त सरलता एवं व्यावहारिकता दिखायी देती है ।
